

बीकानेर। विजयदशमी शौर्य, साहस और वीरता का प्रतीक है। बीकानेर पुलिस अधीक्षक को ऐसा साहस दिखाने कि जरूरत है कि क्रिकेट बुकी, सटोरियों, पुलिस और नेताओं के बीच आपराधिक गठजोड़ तोडा जा सकें। क्या सटोरियों औऱ बुकि को पुलिस और नेताओं का संरक्षण है? पुलिस और नेता इनसे वसूली करते हैं ? अब ये सवाल बेमानी है। जो पार्टी या नेता सत्ता से बाहर हैं वे इस तरह के आरोप लगाते रहते हैं। अभी कई शिष्टमण्डलो ने भी ऐसे कई सवाल उठाए हैं। देवी सिंह भाटी ने भी कई संकेत दिए हैं।


बुकि, सट्टा, घर घर हथियार, अपराधियों की ओर से पुलिस को धमकी औऱ पुलिस का अपराधियों के सामने मिमियाने जैसी हालात भाटी ने प्रेस के सामने बताई। पुलिस अधीक्षक औऱ आईजी की जानकारी में ये सब नहीं है ऐसा हो नहीं सकता। हर किसी की अपनी मजबूरी होती है। खैर अब कुछ नहीं किया तो जिम्मेदार लोग आत्मग्लानि में जीने को मजबूर होंगे। क्योंकि की घटना के बाद पूरे प्रदेश के पुलिस महकमे की नजर बीकानेर पुलिस पर है। खुद मुख्यमंत्री ने संज्ञान ले लिया है। पूरा विपक्ष बीकानेर पुलिस पर निशाना साधे हुए हैं। सबसे बड़ी बात जनता की नजरों से पुलिस उतर गई है यह हालात सबसे बुरे हैं। क्या अपराधी, राजनेता, पुलिस के मिलीभगत का गठजोड़ तोड़ने का साहस कोई दिखा पाएगा ? ऐसा नहीं हो पाया तो जनता की नजर में गिर जाओगे। निर्णय इस पार या उस पार का लेना ही पड़ेगा…!
