-जयपुर पुलिस कमिश्नर का फैसला 8 फरवरी के बाद


जयपुर(हरीश गुप्ता)। भजनलाल सरकार को बने एक महीना से ऊपर हो गया, लेकिन पुलिस महकमे की तबादला सूची अभी तक नहीं आ पाई है। जयपुर पुलिस कमिश्नर की दौड़ में विजय कुमार सिंह, दिनेश एमएन और विशाल बंसल सबसे आगे हैं।
गौरतलब है सरकार ने आईएएस और आरएएस की सूची तो जारी कर दी, लेकिन पुलिस महकमें की सूची में समय लग रहा है। इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। चर्चाएं हैं, ‘पुलिस मुख्यालय में डीजी और एडीजी स्तर के दो अधिकारी एक पखवाड़े से सूची पर होमवर्क कर रहे हैं।’ ‘…’साहब’ के खास एक रिटायर्ड आईजी ने भी खुद की तैयार सूची आगे खिसका दी है, इसीलिए संपट नहीं बैठ रहा। देरी की एक वजह है सूची को दो-तीन जगह से अप्रूव्ड करवाना।
सूत्रों की मानें तो जयपुर कमिश्नर के पद के लिए वीके सिंह का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। उसका कारण है उनकी स्वच्छ छवि और फैसले लेने में सक्षमता। इसके अलावा राजनाथ सिंह की गुड बुक में हैं। साथ ही मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र भी हैं इसीलिए सीएम ने पेपर लीक की जांच के लिए गठित एसआईटी सिंह के निर्देशन में बनाई है।
सूत्रों की मानें तो इसी पद के लिए दिनेश एमएम का नाम भी तेजी से चल रहा है। एमएन दिल्ली वालों की पसंद है और अमित शाह के नजदीकी माने जाते हैं। अपनी वर्किंग स्टाइल के चलते राजस्थान पुलिस के सिंघम माने जाते हैं। इसी तरह विशाल बंसल का नाम भी जयपुर पुलिस कमिश्नर पद के लिए चल रहा है। बंसल की भी स्वच्छ व शालीनता की छवि है। संघ की पसंद बंसल है। अब देखना है तीनों में से किसकी लॉटरी लगती है। यूं तो हर कोई चर्चा कर रहा है कि वर्तमान कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ के आने के बाद कार्य बहुत अच्छे से हो रहा है। कहते हैं पूर्व में कुछ अधिकारी, जो बेलगाम हो गए थे, बीजू से आने के बाद से ठंडे पड़ गए। वैसे बीजू से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन मैसेज देने के लिए बदला जा सकता है।
सूत्रों की मानें तो चर्चाएं जोरों पर है, ‘सरकार के हर काम में देरी हो रही है। पहले मंत्रिमंडल में, फिर विभागों के वितरण में देरी।’ ‘…और अब पुलिस की सूची में भी देरी, जबकि सत्ता बदलते ही पुलिस की सूची बदल दी जाती रही है।’ ‘…हर कार्य में देरी करने के आयाम स्थापित कर रही है सरकार।’ अब माना जा रहा है विधानसभा सत्र के बाद सूची आ जाएगी। चर्चाएं हैं, ‘अभी सब कुछ अस्थाई चल रहा है जैसे सीएम के प्रिंसिपल सेक्रेटरी टी. रविकांत और डीजीपी दोनों कार्यवाहक हैं।’ ‘आखिर कब तक कार्यवाहक से काम चलेगा? सरकार में कुछ स्थाई होगा भी या नहीं?’ ‘…ऐसे ही एक स्वयंभू सीएम का प्रेस सलाहकार बना हुआ और बिना पद के सरकारी सुविधाओं का लाभ ले रहा हैं।ख्याल वह भी कार्यवाहक है?‘
