बीकानेर,(हेम शर्मा).बीकानेर में उच्च स्तर के अधिकारियों से लेकर थाना और पुलिस कांस्टेबल के स्तर पर कहीं नशे को संरक्षण तो नहीं है। कांग्रेस राज में तो नेताओं की शह पर हुक्काबार और अवेध शराब बिक्री करनेवाले लोगों का संरक्षण रहा है। मुख्यमंत्री जी आपकी नशे के प्रति जीरो टॉलरेंस पुलिस की मिलीभगत और कमाई में बाधा है। पुलिस थानों के आस पास , स्कूलों के नजदीक धडले से हुक्काबार चल रहे हैं जो अपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे है। यह कोई आईजी, एसपी की निगाहों में नहीं हो ऐसी बात नहीं है, बल्कि हल्का थाने की मिलीभगत है। आप ने भले ही बीकानेर में संभाग स्तर की बैठक में जिलों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई हो। इस जिम्मेदारी का भान करवाया हो कि युवा पीढ़ी को नशे के दुष्प्रभाव से बचाना हमारी जिम्मेदारी है। भले ही निर्देश दिए हो कि पुलिस स्थानीय संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों, समाज के प्रबुद्धजनों के साथ सहयोग और संवाद करते हुए एक अभियान के रूप में लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें। इससे अघोषित रूप से पुलिस के संरक्षण में चल रहे हुक्काबार और नशे के काम में लोगों पर लीपापोती हो सकती है। ठोस कार्रवाई नहीं होने वाली। पहले भी ऐसे ही हुआ है। पुलिस गश्त बढ़ाने और मुखबिर तंत्र को मजबूत करने की जरूरत ही नहीं है हल्का पुलिस के सब रिकार्ड में है। यह कड़वा सच है कि यही धंधे पुलिस की अतिरिक्त आमदनी के स्त्रोत भी तो हैं। नई सरकार में अभी तक भले ही ऐसे कोकस को राजनीतिक संरक्षण नहीं मिला हो, परंतु पुलिस की मिलीभगत तो है ही। मुख्यमंत्री जी आप चाहते हैं अवैध खनन रोकना,शराब तस्करी रोकना, अवैध रॉयल्टी रोकना तो पुलिस के ऊपर से नीचे तक के तंत्र फिर से परखना पड़ेगा। बीकानेर में ऐसे मामलों में पुलिस का रवैया क्या रहने वाला है आप अपने स्तर पर एक पखवाड़े बाद समीक्षा करवा लें। आपके विधायक है। पार्टी के पदाधिकारी है। अधिकारी भी हैं। केवल कहने से और निर्देशों से ज्यादा उम्मीद करना भूल है। हकीकत जानते रहना।