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पूर्णिमा मित्रा के बाल एकांकी संग्रह संकळप का लोकार्पण

बीकानेर।उजास संस्थान के तत्वावधान में सुश्री पूर्णिमा मित्रा के बाल एकांकी संग्रह संकळप का लोकार्पण करणी नगर में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हिंदी और राजस्थानी के प्रख्यात साहित्यकार डा. मदन सैनी ने कहा कि इस एंकाकी संग्रह की आठों एकांकी‌ सुरूचिपूर्ण भाषा में बच्चों के लिये बहुत ही प्रेरणादायक एवं उनके व्यक्तित्व विकास में बहुत सहायक सिद्ध हो सकती है। इनमें नाटकीयता का गुण विद्यमान है।मुख्य अतिथि श्री कृष्णलाल विश्नोई ने कहा कि राजस्थानी भाषा में एकरूपता जरूरी है।अलग अलग बोलियों के बावजूद यह भाषा बहुत समृद्ध है।संकळप राजस्थानी बाल एकांकी संग्रह राजस्थानी भाषा को समृद्ध करने में सहायक होगा। विशिष्ट अतिथि कवयित्री यामिनी जोशी ने कहा कि पूर्णिमा मित्रा की बाल साहित्य की यह पुस्तक बच्चों में अच्छे संस्कार प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। इस अवसर पर उजास संस्था की अध्यक्ष दर्शना कंवर उत्सुक ने जोधपुर की हिंदी और राजस्थानी की वरिष्ठ साहित्यकार बसंती पंवार द्वारा पुस्तक पर लिखा गया पत्र वाचन प्रस्तुत किया और अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि राजस्थानी भाषा को जन जन तक पहुंचाने के लिए राजस्थानी में अधिकाधिक साहित्य सृजन की आवश्यकता है।उन्होंने।संकळप की इन एंकाकियों के स्कूलों में मंचन व प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं करवाने की बात कही।
लेखिका पूर्णिमा मित्रा ने अपने रचनाकर्म को साझा करते हुए बताया कि उनकी बचपन से इस दिशा में काम करने की ललक थी। इसीलिये हिंदी की बाल पत्रिकाओं में बतौर बाल एंकाकीकार‌ छपने के बाद उन्होंने राजस्थानी में यह संग्रह प्रकाशित करवाने का निर्णय लिया।कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत उद्बोधन करते हुए व्यंग्यकार,लेखक और संपादक डॉक्टर अजय जोशी ने कहा कि बाल साहित्य सृजन के लिए बाल मनोविज्ञान की जानकारी जरूरी है।लेखक को उनकी भाषा और भावनाओं के अनुरूप अपना सृजन करना पड़ता है।कार्यक्रम का संचालन संस्कृतिकर्मी मुनींद्र प्रकाश अग्निहोत्री ने किया और आभार ज्ञापन श्री सुभाष विश्नोई ने किया।

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