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प्रकृति, पर्यावरण और पारिस्थिति को समझे


अंतरिक्ष में पृथ्वी और पृथ्वी पर वनस्पति, पेड़ पौधे के साथ मानव जीव, जंतु और जनावर की रचना एक अनोखा वैज्ञानिक रहस्य है जिसे समझ पाना इंसानी दिमाग के लिए अभी तो असंभव है। जब से मानव जाति ने अपना मानसिक विकास शुरू किया तब से थोड़ा-थोड़ा इस रहस्य के बारे में जानने की कोशिश जारी रखी, हमारे पूर्वजों ने प्रकृति से अपना रिश्ता बनाए रखा था और उनकी पूरी जीवन शैली प्रकृति पर्यावरण और पारिस्थिती के अनुरूप होती थी। जैसे ही हमने भौतिक विकास के साधन बनाना शुरू किये बस वही से हमने प्रकृति पर्यावरण और पारिस्थिति से दूर होने की राह खोल ली, नतीजन आए दिन हमारा जिवन तनावग्रस्त और बीमारीप्रदत्त हो गया। हमारे जीवन की अजीब सी जीवनशैली बन गई, हमें  झात ही नहीं कि हमारा जीवन इस संसार मे क्यो और किस लिए है, हम जीवन में क्या चाह रहे हैं स्वस्थता के साथ तनाव मुक्त जीवन या विलासिता से निष्क्रिय और कष्टमय जिवन। कईयो ने सिर्फ पैसा कमाने की होड़ मे कटुता, नीचता, दोगलापन, भ्रष्टाचार की राह पकड़ी। सभी जानते हैं कि एक दिन सबको मरना है। सोचना यह है कि जब तक जिवीत हैं पृथ्वी पर हैं तो फिर हम अपनी जीवनशैली को कैसे यहां के पर्यावरण और पारिस्थिति से जोड़ें। आवश्यकता है व्यक्ति विकास की राह पर्यावरण और पारिस्थिति के ज्ञान विज्ञान के साथ चले। यह बात है तो मुश्किल क्योंकि अभी तक इंसान पृथ्वी के रहस्य से अभी अनिभिग्य है।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)

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