Site icon OmExpress

प्रशांत महासागर के गर्म होने से मौसम चक्र गडबडाया*


पिछले दिनों एक नया शोध सामने आया है कि भारतीय-प्रशांत महासागर के गर्म होने के कारण बारिश का भारत का ही नहीं बल्कि वैश्विक पैटर्न भी बदला है ।इस शोध में “इंडो-पैसिफिक वार्म पूल का दो गुना विस्तार एमजेओ जीवन चक्र को प्रभावित करता है” शीर्षक से प्रकाशित इस अध्‍ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया है कि भारतीय-प्रशांत महासागर के गर्म हिस्से का आकार दोगुना हो गया है और पृथ्‍वी पर महासागर के तापमान में यह सबसे बड़ी बढ़ोत्तरी है।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियोरोलॉजी (आईआईटीएम) पुणे में किए गए अध्ययन में आईआईटीएम से ही जुडी प्रशांत समुद्री पर्यावरण प्रयोगशाला, राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन, सिएटल, वाशिंगटन, यूएसए के वायुमंडल और महासागर अनुसंधान संस्थान, टोक्यो विश्वविद्यालय, और वायुमंडलीय विज्ञान विभाग, वाशिंगटन विश्वविद्यालय, सिएटल, वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका के वैगयानिक इस शोध में साझीदार हैं।शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रशांत महासागर के गर्म हिस्से में हो रही बढ़ोत्तरी ने उस मौसम के उतार-चढ़ाव को बदल दिया है, जिसका स्रोत भूमध्‍य रेखा के ऊपर है। इसे मड्डेन जूलियन ऑस्‍सीलेशन (एमजेओ) कहते हैं।
अध्ययन में यह तथ्य सामने आया कि एमजेओ के व्यवहार में बदलाव के कारण उत्तरी ऑस्‍ट्रेलिया, पश्चिम पैसिफिक, अमेजॉन बेसिन, दक्षिण-पश्चिम अफ्रीका और दक्षिण-पूर्वी एशिया (इंडोनेशिया, फिलीपींस और पापुआ न्यू गीनिया) में बारिश बढ़ गई है। उसी दौरान इन्हीं परिवर्तनों के कारण सेंट्रल पैसिफिक, यूनाइटेड स्टेट्स के पश्चिम और पूर्वी हिस्से में (उदाहरण के लिये कैलीफोर्निया), उत्तर भारत, पूर्वी अफ्रीका और चीन के यांगज़े बेसिन में बारिश में गिरावट दर्ज हुई है।
यह भी ज्ञात तथ्य है कि एमजेओ भूमध्‍यरेखा के ऊपर चक्रवात, मॉनसून, और एल नीनो साइकल को नियंत्रित करता है- और कभी-कभी एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका में मौसम की विनाशकारी घटनाओं को अंजाम देता है। भूमध्‍य रेखा के ऊपर महासागर में एमजेओ १२०० से २०००० किलोमीटर तक की दूरी तय करता है, खास तौर से भारतीय-प्रशांत महासागर के गर्म हिस्से के ऊपर से, जिसका तापमान आमतौर पर समुद्री तापमान २८ डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक रहता है।
सब जानते है कि कार्बन उत्सर्जन के कारण हाल ही के दशकों में भारतीय-प्रशांत महासागर का गर्म हिस्सा और अधिक गर्म हो रहा है और तेज़ी से इसका विस्तार हुआ है। १९०० -१९८० तक महासागर के गर्म हिस्से का क्षेत्रफल २.२ x १०७ वर्ग किलोमीटर था। १९८१ में इसका आकार बढ़ कर ४ × १०५ वर्ग किलोमीटर हो गया, जोकि कैलिफोर्निया के क्षेत्रफल के बराबर है।

अध्ययन में कहा गया है कि यद्यपि सम्पूर्ण भारतीय-प्रशांत महासागर गर्म हो गया है, इसमें सबसे गर्म पानी पश्चिमी प्रशांत महासागर में है, जिससे तापमान में अंतर पैदा होता है, जो भारतीय महासागर से नमी को साथ लेकर पश्चिम प्रशांत समुद्री महाद्वीप तक ले आता है, और यहां पर बादल बनते हैं। इसके परिणामस्वरूप एमजेओ का जीवनचक्र बदल गया है। भारतीय महासागर पर एमजेओ के बादलों के बने रहने का समय औसतन १९ दिन से करीब ४ दिन घट कर औसतन १५ दिन हो गया है। जबकि पश्चिमी प्रशांत पर यह ५ दिन बढ़ गया है (औसतन१६ दिन से बढ़कर २१ दिन हो गया है)। एमजेओ बादलों के भारतीय महासागर और पश्चिमी प्रशांत सागर पर बने रहने के समय में बदलाव ही है जिसके कारण पूरी दुनिया के मौसम में परिवर्तन हुआ है।
हमें हमारे महासागर पर नज़र रखने वाले निरीक्षण यंत्रों को अत्याधुनिक बनाने की जरूरत है, ताकि मौसम में होने वाले परिवर्तन का सटीक अनुमान लगाया जा सके, और गर्म होती दुनिया के कारण भविष्‍य में आने वाली चुनौतियों का भी कुशलतापूर्वक अनुमान लगाया जा सके।”

Exit mobile version