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प्रिंट मीडिया की दुनिया, कुछ पत्रकार कर रहे मैली


एक टाइटल याद आ रहा ” राम तेरी गंगा मैली हो गई ” क्योंकि सबसे विश्वसनीय सच्चाई पसंद, समाज को सही आईना दिखाने वाली प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता मैं कुछ नाम मात्र के पत्रकार नगर प्रतिनिधि लगा रहे दाग। कई जगह हालात इतने बिगड़े हैं बिना पैसे लिए नगर प्रतिनिधि न्यूज़ नहीं छापेगा। जिससे नहीं पटेगी न्यूज़ में से उसका नाम हटा देगा। आम आदमी हर बात के लिए अखबार मालिक या उनके चीफ मैनेजर या एडिटर के पास जा नहीं सकता। और सबसे बड़ी बात है कि अखबार के खोजी रिपोर्टर खोज लेते है कि कहां कुछ गलत हो रहा है परंतु उनके कुछ पत्रकार कहां गलती कर रहे हैं यह बात उनके नॉलेज में क्यों नहीं आ रही। यह आम धारणा बन चुकी है कि आमतौर पर बिना दिए लिए आपकी न्यूज़ नहीं छपेगी। चाहे आप गिफ्ट के रूप में दो या अन्य रूप में दो। इसीलिए लोगों ने पत्रकारों को इंटरटेन करना शुरू कर दिया। नेता, संत, व्यापारी यदि किसी को पब्लिसिटी चाहिए तो उनको सेटिंग करना पड़ेगी और यह बात तो डिक्लियर भी है कि चुनाव या बड़े आयोजन में ठेके बंदी हो जाती है किआप की न्यूज़ रोज छपाई की क्या शर्ते है। कुछ पत्रकार तो इतना गिर गए कि वह लोगों को धोस देने लगे उनसे पैसे ऐठने लग गए और उनकी बुराई को उजागर ना करते हुए वही ढक देते हैं। आजकल सत्ता पक्ष या विपक्षी, सरकारी बड़े अधिकारी, व्यापारी, इंडस्ट्रीलिस्ट, पुलिस अधिकारी नामी-गिरामी पत्रकार को सिर आंखों पर रखते हैं। यानी नामी-गिरामी वह ट्रंप कार्ड होते हैं जिनका कहीं कोई काम नहीं रुकता। कई पत्रकार आज भी बेहद ईमानदारी से अपनी जान पर खेलकर भी बेखौफ खबरें लिखते हैं। उन्हें सलाम।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)

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