फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के डॉक्टरों ने 76 वर्षीय एक मरीज की सांस की नली में गंभीर रुकावट पैदा कर रहे 7 × 9 सेंटीमीटर के दुर्लभ ट्यूमर का विशेष स्कोप-आधारित प्रक्रिया के माध्यम से सफलतापूर्वक इलाज किया। इस प्रक्रिया में ओपन सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ी। इस जटिल मामले का प्रबंधन डॉ. विनोद कुमार शर्मा, कंसल्टेंट – पल्मोनोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के नेतृत्व में विभिन्न विशेषज्ञताओं की एक टीम ने किया।
मरीज पिछले छह महीनों से सांस लेने में परेशानी का सामना कर रहे थे। सांस लेने में अचानक गंभीर तकलीफ, लगातार खांसी और तेज घरघराहट के बाद उन्हें अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में लाया गया। उनकी स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि वे सीधे लेट भी नहीं पा रहे थे और सांस लेते समय तेज आवाज के साथ काफी कठिनाई हो रही थी। छाती की स्कैनिंग में एक बड़ा ट्यूमर सामने आया, जो सांस की नली को काफी हद तक अवरुद्ध कर रहा था और मरीज की सांसों के लिए गंभीर खतरा बन गया था। आगे की जांच में इस ट्यूमर की पहचान लार्ज सेल न्यूरोएंडोक्राइन कार्सिनोमा (LCNEC) के रूप में हुई। यह फेफड़ों के कैंसर का एक दुर्लभ और आक्रामक प्रकार है, जो दुनिया भर में होने वाले घातक फेफड़ों के ट्यूमर के 3 प्रतिशत से भी कम मामलों में पाया जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार, यह एक अत्यंत जोखिम भरा मामला था। सांस की मुख्य नली से इतने बड़े ट्यूमर को निकालने के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और अचानक गंभीर जटिलताएं होने का खतरा था। इसके अलावा, मरीज की अधिक उम्र और पहले से मौजूद हृदय संबंधी अनियमितताओं के कारण प्रक्रिया तथा एनेस्थीसिया से जुड़े जोखिम भी काफी बढ़ गए थे।
मरीज की जनरल एनेस्थीसिया के तहत लगभग दो घंटे तक रिजिड ब्रोंकोस्कोपी (Rigid Bronchoscopy) प्रक्रिया की गई। इस विशेष तकनीक में एक कठोर धातु की ट्यूब के माध्यम से सांस की नली तक पहुंचकर उपचार किया जाता है। विशेषज्ञों की टीम ने सफलतापूर्वक ट्यूमर को निकाल दिया और सांस की नली में मौजूद रुकावट दूर कर दी। इस पूरी प्रक्रिया में ओपन सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ी। प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और उनकी सांस लेने संबंधी परेशानियां पूरी तरह समाप्त हो गईं। उन्हें अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
मामले की जानकारी देते हुए *डॉ. विनोद कुमार शर्मा, कंसल्टेंट – पल्मोनोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल* , जयपुर ने कहा, “सांस की मुख्य नली में गंभीर रुकावट, मरीज की अधिक उम्र और पहले से मौजूद हृदय संबंधी समस्याओं के कारण यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण और उच्च जोखिम वाला मामला था। मरीज की सांस सामान्य करने और उपचार संबंधी जोखिमों को न्यूनतम रखने के लिए तत्काल चिकित्सकीय निर्णय लेना और बेहद सटीक प्रक्रिया करना आवश्यक था। विशेष तकनीकों की मदद से हमारी टीम ने जनरल एनेस्थीसिया के तहत बिना किसी बड़ी जटिलता और ओपन सर्जरी के पूरे ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया। मरीज का तेजी से स्वस्थ होना और अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी मिलना हमारी टीम की विशेषज्ञता, आपसी समन्वय और मरीजों को बेहतर से बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
डॉ. मनीष अग्रवाल, फैसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर ने कहा, “इस तरह की जटिल और अत्यंत गंभीर आपातकालीन स्थिति का प्रबंधन करने के लिए असाधारण विशेषज्ञता और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होती है। हम चिकित्सा क्षेत्र में नवाचार को आगे बढ़ाने और अपने मरीजों को सर्वोत्तम संभव उपचार परिणाम प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह सफलता फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के डॉक्टरों की विशेषज्ञता और यहां उपलब्ध उन्नत चिकित्सा सुविधाओं का प्रमाण है।”

