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फोर्टिस हॉस्पिटल जयपुर द्वारा 2 दिवसीय ‘पल्मो क्रिटिकोन 2026’ का आयोजन, पल्मोनोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर में विशेषज्ञ सत्रों और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के जरिए उन्नत ज्ञान साझा

जयपुर, 21 अप्रैल 2026: फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर द्वारा सफलतापूर्वक पल्मो क्रिटिकोन 2026 का आयोजन किया, जो पिंकसिटी का पल्मोनोलॉजी और क्रिटिकल केयर पर आधारित कांफ्रेंस है। इस दो दिवसीय कांफ्रेंस में देशभर के प्रमुख विशेषज्ञों और जनरल प्रैक्टिशनर्स ने भाग लिया। कार्यक्रम में उच्च स्तरीय वैज्ञानिक चर्चाओं के साथ-साथ हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग का समावेश किया गया, जिससे श्वसन एवं क्रिटिकल केयर चिकित्सा में क्लिनिकल विशेषज्ञता को सुदृढ़ किया जा सके।
सीओपीडी

कांफ्रेंस के पहले दिन का आयोजन होटल क्लार्क्स आमेर में किया गया, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। चर्चाओं में सीओपीडी और हृदय रोगों के बीच संबंध, गंभीर अस्थमा में बायोलॉजिक्स की प्रगति, निमोनिया का प्रबंधन, तथा एक्मो और एंटीबायोटिक स्टूवर्डशिप जैसी क्रिटिकल केयर में नई तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया गया। इन सत्रों में प्रमाण-आधारित उपचार पद्धतियों और व्यावहारिक क्लिनिकल अनुभवों पर जोर दिया गया, जिससे जनरल प्रैक्टिशनर्स को बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिली।

दूसरे दिन का आयोजन फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर में हुआ, जिसमें हैंड्स-ऑन लर्निंग और उन्नत प्रक्रियात्मक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिभागियों को थोरैसिक अल्ट्रासाउंड, ब्रोंकोस्कोपी, EBUS और एयरवे इंटरवेंशन जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण व लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से अनुभव प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में लंग ट्रांसप्लांट प्रोटोकॉल, मेडियास्टाइनल डायग्नोस्टिक्स और जटिल एयरवे स्थितियों के प्रबंधन पर भी सत्र आयोजित किए गए, जिससे प्रतिभागियों को समग्र ज्ञान प्राप्त हुआ।

कांफ्रेंस चेयरमैन डॉ. अंकित बंसल एवं सेक्रेटरी डॉ. विनोद शर्मा, कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल , जयपुर ने कहा, “पल्मो क्रिटिकोन 2026″ का उद्देश्य उन्नत पल्मोनोलॉजी प्रथाओं और प्राथमिक चिकित्सा के बीच की खाई को पाटना है। पहले दिन जहां ज्ञान साझा किया गया, वहीं दूसरे दिन हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण के माध्यम से चिकित्सकों का आत्मविश्वास बढ़ाया गया, जो बेहतर मरीज परिणामों के लिए अत्यंत आवश्यक है।”

डॉ. ध्रुवा चौधरी, वरिष्ठ प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन, PGIMS रोहतक ने कहा, “श्वसन रोगों का बढ़ता बोझ एक बहु-विषयक और प्रमाण-आधारित दृष्टिकोण की मांग करता है। पल्मो क्रिटिकोन जैसे मंच चिकित्सकों को व्यावहारिक ज्ञान और समेकित कौशल प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”

डॉ. मनोज कुमार गोयल, प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं यूनिट हेड – पल्मोनोलॉजी एवं स्लीप मेडिसिन, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने कहा, “पल्मोनोलॉजी और क्रिटिकल केयर तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र हैं। ऐसे शैक्षणिक मंच चिकित्सकों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाए रखने में सहायक होते हैं।”

डॉ. निशांत कुमार चौहान, प्रोफेसर, पल्मोनरी मेडिसिन, एम्स जोधपुर ने कहा, “इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी तेजी से आगे बढ़ रही है। इस प्रकार के प्रशिक्षण-आधारित सम्मेलन चिकित्सकों को नई तकनीकों को सुरक्षित रूप से अपनाने में मदद करते हैं।”

सम्मेलन का समापन वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ, जिसमें जयपुर के पहले पल्मो क्रिटिकोन के सफल आयोजन की घोषणा की गई। यह पहल फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर की चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने और श्वसन एवं क्रिटिकल केयर सेवाओं को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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