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फोर्टी समेत प्रदेश की औधोगिक एससीएसनों ने लोकडाउन अवधि में श्रमिकों को वेतन नहीं देने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लगा रही है याचिका

जयपुर। उद्योग एवं व्यापार जगत की शीर्ष संस्था फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री (फोर्टी) के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट बीएल गुप्ता ने बताया कि फोर्टी और प्रदेश की अग्रणी 9 औद्योगिक संगठनों व एसोसिएशनों ने मिलकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर लाकडाउन के दौरान उद्योग व व्यापार जगत द्वारा कार्मिकों व श्रमिकों को किसी भी तरह का वेतन नहीं देने के आदेश जारी करने की गुहार की है। ऐसी मुश्किल की घड़ी में व्यापारियों को राहत देते हुए सरकार द्वारा श्रमिकों का भुगतान पी. एफ., ई. एस.आई व सेस में उपलब्ध फण्ड से किया जाना चाहिये ।

फोर्टी कार्यकारी अध्यक्ष अरुण अग्रवाल ने बताया कि याचिका में सुप्रीम कोर्ट से गुहार की गई है कि वैश्विक कोरोना महामारी के दौरान हुए लॉकडाउन में 22 मार्च से सम्पूर्ण उघोग व व्यापार जगत पूरी तरह बंद है। अचानक लाकडाउन से इकाइयों व ट्रेडर्स के यहां तैयार प्रोडक्स खराब होने व फेक्ट्री का किराया, मशीनों की किस्तें व अन्य फुटकर खर्च का भुगतान करना पहले से ही चुनोतिपूर्ण है। सभी उद्योग बन्द होने के कारण बिक्री भी पूर्णतया बन्द रही है, ऐसी स्थिति में उधमी इकाइयों में कार्यरत कार्मिकों व श्रमिकों को लोकडाउन अवधि का भुगतान करना सम्भव नहीं है। इस संबंध में फोर्टी और प्रदेश की अग्रणी नो ओधोगिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को एक याचिका दायर कर रहे है।

फोर्टी के उपाध्यक्ष विनोद गुप्ता ने बताया कि मॉडिफाइड लॉकडाउन के दौरान भी राज्य सरकार के सख्त नियमों के चलते अधिकतर एमएसएमई इकाइयां व उद्योग पूरी तरह बंद रहे हैं।ऐसी स्थिति में उद्योगों के मालिक श्रमिकों का भुगतान नहीं कर सकते हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से आग्रह कर रहे है कि इस याचिका को स्वीकार कर उन्हें राहत प्रदान करें।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने को लेकर फोर्टी के साथ राजस्थान स्टील चैंबर, विश्वकर्मा इंडस्ट्री एरिया औद्योगिक एसोसिएशन, यूकोरी, बियरिंग एसोसिएशन, फाउंड्री एसोसिएशन भिवाड़ी रोलिंग मिल्स एसोसिएशन समेत प्रदेश की अधिकतर एसोसिएशने साथ रही

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