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बिजली विभाग की स्मार्ट मीटर योजना और जनता की शंका


स्मार्ट मीटर से सीधी रीडिंग जाकर आपका बिल बनता है और आपके पास आजकल बिल की हार्ड कॉपी नहीं आती है यदि इंटरनेट बंद है तो आप ईमेल यह मैसेज नहीं देख पाएंगे और बिल की तारीख चुकने पर आपको फाइन देना पड़ेगा दूसरी बात भविष्य में यह स्मार्ट मीटर के जरिए आपके अकाउंट से जोड़ने वाले हैं या प्रीपेड कार्ड बनाने वाले हैं तब आप इनके द्वारा की गई किसी भी गड़बड़ी के लिए क्लेम नहीं कर सकेंगे, वह भुगतान आपके पास से हो चुका होगा।
बिजली विभाग पर शंका के कई कारण हैं क्योंकि विभाग हर बार अपने आप को घाटे में बताता है। जबकि कनेक्शन लेने पर प्रत्येक सामान आप खरीद कर देते हो। सरकार का दायित्व होता है कि जनता के साथ अन्याय ना हो पर यहां सरकार सिर्फ अपनी कमाई देखने में है और बिजली विभाग को निजी हाथों में दे रखा है। जनता की गलती पर उसको पनिशमेंट के कई साधन है पर यह जो विभाग सरेआम गड़बड़ी कर जाते है इनको पनिशमेंट के लिए जनता क्या कर सकती हैं।
मीटर टेस्टिंग भी कहां होती है जनता नहीं जान पाती कि उसका मीटर टेस्ट हुआ या नहीं और टेस्ट रिपोर्ट उसे नहीं मिलती। मीटर टेस्टिंग भी निष्पक्ष लैब में होना चाहिए। बिजली विभाग में अपने हर ग्रीड पर सबसे पहले स्मार्ट मीटर लगाना चाहिए ताकि मालूम पड़े कि कितनी बिजली आई उन्होंने कितनी सप्लाई की और कितनी सप्लाई के बिल बने। क्योंकि यह भी एक शिकायत थी कि ग्रिड ने अधिक यूनिट कंजप्शन के बिल बनाकर जनता से पैसा वसूला।
यह सब शंका है इनका समाधान कैसे हो।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार पर्यावरणविद्)

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