चंडीगढ़ रिपोर्ट – राजेंद्र सोनी। पति से तलाक लिए बिना अपने प्रेमी के साथ रहने व संबंध बनाना एक महिला को भारी पड़ा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पति व उसके परिवार से जान को खतरा बता कर सुरक्षा की मांग करने पर महिला को फटकार लगाते हुए उस पर मोटा जुर्माना भी लगाने का आदेश दिया। हाईकोर्ट के जस्टिस मनोज बजाज ने सिरसा निवासी एक महिला की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला दिया। इस मामले में याचिकाकर्ता महिला की शादी दिनेश कुमार से 2011 में हुई थी और दंपती के दो बच्चे थे। याचिकाकर्ता के अनुसार शादी उसकी मर्जी के खिलाफ थी, क्योंकि उसका पहले से ही सहमति संबंध (लिव-इन पार्टनर) के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। हालांकि, उसने परिवार की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए शादी को स्वीकार कर लिया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उसका पति शराब, ड्रग्स आदि लेता है और स्वभाव से झगड़ालू है। उसने शादी तोड़ने की कोशिश की थी लेकिन उसके माता-पिता ने उसे उसके पति के साथ वापस भेज दिया। हालांकि, 2 अगस्त, 2020 को उसने अपने पति का साथ छोड़ने का फैसला किया था। उसके माता-पिता ने उसके फैसले पर आपत्ति जताई लेकिन उसने अपने प्रेमी के साथ रहना शुरू कर दिया। याचिकाकर्ता और उनके सहमति संबंध पार्टनर ने एक लिखित समझौता किया और 13 सितंबर को ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ डीड करवाई। इसके अनुसार दोनों ने यह घोषणा की कि वे स्वतंत्र सहमति और पूर्ण समझ से संबंध में रहेंगे। आगे इस बात पर सहमत होंगे कि वे भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ अदालती कार्रवाई अर्थात दुराचार, घरेलू हिंसा या किसी अन्य वैवाहिक विवाद का मामला शुरू नहीं करेंगे। याचिकाकर्ता और उसके सहमति संबंध पार्टनर के अनुसार, अब महिला का परिवार और उसका पति उनके रिश्ते के खिलाफ हैं और धमकी दे रहे हैं। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को यह भी बताया कि चूंकि वह अभी भी दिनेश की पत्नी है। उसने सिरसा पुलिस से सुरक्षा की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ डीड बनवाने से इसे वैध नहीं माना जा सकता। यह सब व्यभिचारिणी आचरण को दर्शाता है। हाईकोर्ट ने पाया कि महिला के जीवन को कोई खतरा नहीं है, क्योंकि यह अपवित्र गठबंधन है। इसको कानूनी कवर प्रदान करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जो कानूनी अधिकार का दुरुपयोग है। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए महिला को 25,000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, सिरसा में जमा करवाने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सिरसा को आदेश दिया कि महिला से यह राशि वसूली और जमा करना सुनिश्चित करे।