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बिहार में किसानों को फिर से कृषि यंत्रों पर अनुदान देने की तैयारी

सौ करोड़ के प्लान में इस बार 75 की जगह 80 यंत्रों पर मिलेगा
नई योजना में किसानों को ट्रेनिंग के साथ यंत्रों की देखरेख का भी प्रशिक्षण

रिपोर्ट – अनमोल कुमार

पटना : किसानों के लिए खुशखबरी! बिहार सरकार कृषि यंत्रों पर अनुदान देने की योजना फिर से शुरू करने जा रही है। केंद्र की योजना तो पहले से ही चल रही है अब राज्य सरकार अपनी योजना लाने जा रही है। लगभग सौ करोड़ का प्लान बना है। सरकार की मुहर लग गई तो इस बार 80 यंत्रों पर अनुदान मिलेगा। राज्य सरकार अपने खजाने से लगभग 75 यंत्रों पर अनुदान देती रही है। बता दें कि पिछले वर्ष इस योजना को बंद कर दिया गया था, लेकिन इस बार अनुदान के साथ यंत्रों की संख्या भी बढ़कर 80 हो जाएगी। लागत का 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। पराली प्रबंधन से जुड़े यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान मिल सकता है। नये यंत्रों में सरकार का सबसे अधिक जोर लैंड लेबलर पर होगा। इसके अलावा गन्ना पेराई मशीन पर भी अनुदान मिलेगा। उद्यान से जुड़े कुछ नये यंत्र भी अनुदान सूची में इस बार शामिल किये गये हैं। नई योजना में किसानों को ट्रेनिंग देने का भी प्रावधान किया गया है। नये यंत्रों के संचालन के साथ यंत्रों के रख-रखाव की ट्रेनिंग किसानों को दी जाएगी। विभाग का इस बार जोर लेजर लैंड लेबलर पर इसलिए है कि उसका मानना है कि समतल भूमि से फसल उपज में 20 से 25 फीसदी तक वृद्धि होगी। लिहाजा विभाग इसके लिए अभियान भी चला रहा है। लेजर लैंड लेबलिंग विषय पर एक प्रशिक्षण पुस्तिका भी विभाग ने प्रकाशित की है। विभाग के मुताबिक, जीरो टिलेज जैसी आधुनिक मशीन से एक खास गहराई पर बीज गिराया जाता है परन्तु खेत समतल नहीं रहने के कारण मशीन एक ही गहराई में बीज नहीं गिरा पाता है। इससे बीज का जमाव, बढ़वार प्रभावित होती है। खेत के समतल नहीं रहने के कारण खेत के किसी भाग में पानी का जमाव हो जाता है तो खेत के दूसरे भाग में नमी की कमी हो जाती है। इससे भी फसल का उपज प्रभावित होती है।

बिहार सरकार ने कृषि यंत्रों पर अनुदान देने की योजना शुरू की तो राज्य में कृषि यंत्रीकरण में काफी वृद्धि हुई। 2005 के पहले राज्य में ट्रैक्टर के अलावा कोई यंत्र खेतों में नहीं दिखता था।

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