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बिहार में राजनीतिक उथल-पुथल के आसार ,48 घंटे के भीतर बदल सकती बिहार सरकार

एस एन श्याम / अनमोल कुमार

पटना,24 मई। बिहार में जातीय जनगणना के मुद्दे पर एन डी ए में टूट के आसार नजर आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारे में अगले 48 घंटा बिहार की सियासत भारी पड़ने वाला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जेडीयू के तमाम विधायकों को अगले 72 घंटे तक पटना में ही रहने के अल्टीमेटम जारी कर दिया है । इधर भाजपा भी मूकदर्शक बनकर जेडीयू और राजद के बीच पक रही राजनीतिक खिचड़ी पर नजर गड़ाए हुए हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में जातीय जनगणना कराए जाने की घोषणा कर दी है।इसे लेकर जेडीयू और भाजपा के बीच तकरार बढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि जातीय जनगणना देश में नहीं होगी ।भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश नेतृत्व को स्पष्ट कह दिया है कि बिहार में जातीय जनगणना किसी भी कीमत पर भाजपा की मौजूदगी में नहीं होनी चाहिए। इसे लेकर भाजपा और जेडीयू में राजनैतिक दूरियां काफी बढ़ गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 27 मई को जातीय जनगणना के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाया है ।राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा गर्म है कि भाजपा इस बैठक में शामिल नहीं होगी या फिर बैठक के भीतर जाकर इस मुद्दे पर अपनी सहमति नहीं जताकर बैठक से वॉकआउट कर जाएगी। नीतीश और भाजपा के बीच इसे लेकर जहां एक और टकराव और तनाव बढ़ गया है तो वहीं दूसरी ओर जनता दल यू के सांसद और केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह को राज सभा नहीं भेज जाने को लेकर भी जेडीयू में घमासान मचा हुआ है ।आरसीपी इस फिराक में है कि पार्टी के आधा से ज्यादा विधायकों को तोड़कर अपने साथ लेकर भाजपा में शामिल हो जाएं ताकि उनका मंत्री पद बचा रहे । जनता दल यू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद ललन सिंह और केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के बीच 36 का रिश्ता जग जाहिर है। ऐसे में जेडीयू को जहां एक और अपने ही पार्टी में भितरघात का डर सता रहा है तो दूसरी ओर गठबंधन टूटने को लेकर भी पार्टी के मंत्री और विधायक पशोपेश में है ।
पेशे से इंजीनियर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़े ही तकनीकी ढंग से एनडीए से अलग होने का रोड मैप तैयार किया है
राजनीतिक जानकार बताते हैं कि अगर भाजपा जातीय जनगणना के सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं होती है या बैठक से वॉकआउट कर जाती है तो नीतीश कुमार को भाजपा से अलग होने का मौका मिल जाएगा। और ऐसे में राजद के साथ दोस्ती का फायदा राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और उनकी उनका परिवार उठा सकता है। 26 मई को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और उनके सुपुत्र विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पटना आने वाले हैं ।तेजस्वी इन दिनों लंदन में है और इसी दरमियान तेजस्वी की मां और पूर्व मुख्य मंत्री राबड़ी देवी के घर सीबीआई का छापा भी पड़ चुका है।
ऐसे में नीतीश कुमार भाजपा से अलग होकर राजद के गोद में चले जाएंगे। यह कयास लगाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री तो नीतीश कुमार ही रहेंगे लेकिन लालू के दोनों सुपुत्र तेजस्वी और तेजप्रताप को उपमुख्यमंत्री की कुर्सी भी मिल सकती है । हालांकि यह इतना आसान नहीं है क्योंकि अगर एन डी ए टूटता है तो राज्यपाल फागू चौहान बहुमत में होने के बावजूद नीतीश कुमार को सरकार बनाने के लिए बुलाएंगे इसकी कोई गारंटी नहीं है ।क्योंकि राज्यपाल भी भाजपा कोटे से हैं।ऐसे में बिहार में राष्ट्रपति शासन लगने की संभावना से भी इनकार नहीं किया।

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