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बीकानेर का राज परिवार और लता मंगेशकर विशेष

जितेंद्र व्यास। बीकानेर राजमाता सुशीला कुमारीजी से भी था लता जी का जुड़ाव। बीकानेर से आखिर लताजी का क्या था जुड़ाव ? दरअसल डूंगरपुर राजघराने के राज सिंह डूंगरपुर जीवन भर कुंवारे रहे। बीकानेर राजमाता सुशीला कुमारी जी के वे लाडेसर भाई थे। एक समय में लता मंगेशकर के भाई और राज सिंह एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे। वो एक साथ क्रिकेट खेला करते थे। हर्दयनाथ मंगेशकर के साथ ही लताज़ी से मिलना हुआ। उनकी मुलाकात उस समय हुई जब राज सिंह लॉ करने के लिए मुंबई आए।

इस दौरान वो लता के भाई के साथ उनके घर पर जाया करते थे। यह सिलसिला बढ़ता गया और देखते ही देखते राज सिंह और लता जी की भी गहरी दोस्ती हो गई। कहा जाता है कि अपने पिता से किए वादे के कारण राज सिंह ने लता से विवाह नहीं किया। लेकिन इनके साथ लता की दोस्ती हमेशा चर्चा का विषय बनी रही। बीकानेर राजपरिवार के सदस्य राजसा को मीठू मामोसा पुकारते थे। वही राज सिंह जी लता जी को भी मीठू कहा करते थे। राजसा के बाद लता जी ने प्रेम गीत नहीं गाये। भजनों में अधिक स्वर दिए। अर्जुन अवार्डी राज्यश्री कुमारीजी, विधायक सिद्धि बाईसा सहित अनेक सदस्यों का कई बार लताजी से मिलना हुआ।

डूंगरपुर राजघराने से ताल्लुक रखने वाले महाराज ने भी न सिर्फ राजनीति बल्कि क्रिकेट और क्रिकेट प्रशासन की दुनिया में अपना नाम कमाया। वो डूंगरपुर के महाराजा लक्ष्मण सिंह के तीन बेटों में सबसे छोटे थे। उनकी तीन बहनों में से एक बीकानेर की राजमाता है।

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