बीकानेर, । बीकानेर में पाँव पसारता कोरोना संक्रमण फिलहाल राहत की उम्मीदें नहीं दे रहा है। प्रतिदिन संक्रमण की चपेट में आने वालों की संख्या जिस तेजी से बढ़ी है उससे न केवल यह पता चलता है कि संक्रमण बहुत तेज है, बल्कि यह भी कि तमाम उपायों के बाद भी लोग संक्रमित होने से बच नहीं पा रहे हैं। ऐसे में पहली जरूरत इसको थामने और कोरोना मरीजों को उपचार उपलब्ध करवाने की है।

बीकानेर में बुधवार को आयी पहली सूची में कोरोना संक्रमण से 694 व्यक्ति पॉजिटिव आए हैं, जिसमें कुछ लोग बीकानेर से बाहर के हैं। बीकानेर पीआरओ की सूचना के अनुसार बुधवार को 679 व्यक्ति जिले से पॉजिटिव आए हैं। संक्रमण से संबंधित जांचें अधिक होने पर आंकड़ों में भी संख्या ज्यादा देखने को मिल रही है।

अगर गौर किया जाए तो बीकानेर में संक्रमण के प्रतिदिन औसतन 800 मामले लगातार आ रहे हैं। जो यह बताते हैं कि संक्रमण अभी बेलगाम है। स्थिति स्पष्ट भी है कि लॉकडाउन प्रभावी साबित नहीं हो रहा क्योंकि इस दौरान ऐसी गलतियां हो रही हैं, जिनके कारण संक्रमण थम नहीं पा रहा है। आवश्यकता कारणों की तह तक जाने की है। विगत 17 अप्रेल से प्रदेश में प्रभावी रहे लॉकडाउन कम कफ्र्यू में ऐसे मामले भी सामने आए हैं कि लोग पुलिस-प्रशासन की चौकसी के अभाव का लाभ उठा रहे हैं और वे सारे काम कर रहे हैं, जो मौजूदा माहौल में हरगिज नहीं किए जाने चाहिए थे।

कोरोना महामारी की दूसरी लहर में संक्रमण की प्रकृति को समझे बिना अभी भी कुछ लोग महामारी की गंभीरता को समझने के लिए तैयार नहीं। कुछ ऐसे भी हैं जो वैक्सीनेशन से बच रहे हैं। लोगों को चेताने, समझाने और उन तक सही सूचनाएँ पहुँचाने में अब तक आ रही समस्या का कारण जमीनी स्तर पर कार्य का ना होना तथा सही तालमेल नहीं बन पाना है। जिसके चलते संक्रमण लगातार कहर ढा रहा है। महामारी में समय पर सही सूचनाएं और जरूरी जानकारी कई समस्याओं का समाधान करती है। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।

विभिन्न श्रेणियों में लगी पाबंदियों के बावजूद भी गंभीरता कोसों दूर है। कागजों में अलग-अलग नामों से लगे लॉकडाउन क्रम कफ्र्यू के बावजूद भी स्थितियां संभालने की दिशा में नहीं है। नियम बने हैं, नए दिशा-निर्देश भी समय-समय पर लागू हुए हैं, आमजन से उनकी पालना की उम्मीदें भी हैं, लेकिन सरकार स्वयं लचर व्यवस्थाओं में नियमों को लागू रखकर आमजन के लिए समस्याएं बनाए रखती है। आरोप-प्रत्यारोप चलते हैं। विवाद होने की दशा में मामले पर मिट्टी डालने की कोशिशें होती है। लेकिन सब कोशिशें कोरोना काल में आंकड़ों में बयां हो रही हैं।
दरअसल आग लागै जणे कुओं खोदे की स्थिति है हमारी। समस्याएं जब चरम पर आने लगती है, रौद्र रूप धारण कर लेती है, तब शुरूआत होती है उनसे निजात पाने की, हल ढूंढने की। दूरदर्शी सोच से कोसों दूर रहकर खिलवाड़ होता है जनमानस की भावनाओं से। उलझी जनता मजबूर हो जाती है राहत के लिए इधर-से-उधर भटकने को। लेकिन हर जगह जनता को हासिल होने को सिर्फ तकलीफें, दु:ख और लाचारी ही है।

बीकानेर में एक सप्ताह से मृत्यु के आंकड़े भी बढ़े हैं। लोग कोरोना की भयावहता का परिणाम समझ रहें हैं, परन्तु जांच का विषय भी है कि कहीं इलाज में लापरवाही तो नहीं हो रही है। अस्पताल में भर्ती सूत्रों का कहना है कि जिला प्रशासन कि बढ़ती औपचारिक दखल अंदाजी के चलते क्रिया की प्रतिक्रिया हो रही है। जिसका खामियाजा रोगियों को भुगतना पड़ रहा है। नि:संदेह शासन और समाज संक्रमण की दूसरी लहर से जूझने में पूरी शक्ति खपाने के साथ ही भविष्य की चिंता भी कर रहा है, लेकिन आमजन को भी सतर्कता का स्तर बढ़ाते हुए सहयोग देना होगा। हमें यह बुनियादी बात समझ जानी चाहिए कि संक्रमण की तेज लहर को थामने का उपाय यही है कि कम से कम लोग उसकी चपेट में आएं। यह एक कठिन लक्ष्य अवश्य है, लेकिन असंभव नहीं है।

बीकानेर पीआरओ की सूचना के अनुसार बुधवार को 799 व्यक्ति संक्रमण से रिकवर होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। वहीं 2345 सैम्पल्स में 679 कोरोना संक्रमित रोगी मिले हैं और 8 लोगों की मृत्यु हुयी है। जबकि मृत्यु कितनी हुई है यह नहीं बताया गया है। कुल एक्टिव केस 8101 हैं, जिसमे इंस्टिट्यूशनल आइसोलेट48, होम क्वारेन्टइन 7082 तथा शेष पीबीएम में भर्ती है। जिले में कन्टेन्टमेंट जोन 9 (352 माइक्रो कन्टेन्टमेंट) बनाए हुए है।

बुधवार को आई पहली सूची में जहां 45 वर्ष तक के 385 दूसरी सूचि में 146 तथा 45+ के 128 +38 पॉजिटिव मिले हैं। रिपीट पॉजिटिव भी प्रतिदिन आ रहें हैं। बुधवार को जारी सूची में 2 साल से लेकर 83 साल तक को कोरोना की चपेट में आए हैं।

कोरोना महाकहर के मध्य अच्छी खबर रही की बुधवार 12 अप्रैल को 799 , मंगलवार को 1154, सोमवार को 822, रविवार 9 मई को 1020, शनिवार 8 मई को 744, 7 मई को 414, 6 मई को सर्वाधिक 894, 5 मई को 714, 4 मई को 869, 3 मई को 723, 2 मई को 791 व 1 मई को 840 ठीक हुए। रविवार को कुल 2605 लोगों की जांच रिपोर्ट आई, उसमे 777 पॉजिटिव आये, 1020 ठीक हुए तथा 15 की मृत्यु हुई।

– कोरोना को पराजित करने का मूलमंत्र-निज पर शासन फिर अनुशासन
प्रसिद्ध संत आचार्य तुलसी ने कहा था कि किसी भी समस्या के हल के लिए व्यक्ति पहले अपने पर अनुशासन करे फिर दूसरों को अनुशासित करें। राजस्थान सरकार ने अपने विज्ञापन में भी निज पर शासन फिर अनुशासन का सन्देश दिया है। इस सन्देश को राजनेताओं को विशेष रूप आत्मसात करना चाहिए। हाल ही में सम्पन्न हुए चुनावों में नेताओं ने जिस तरह से कोरोना गाइड लाईन की पालना नहीं की वह देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कोरोना के कारण इन दिनों घरों पर ही ठहरना सबसे उत्तम तरीका है, बीमारी से बचने का। चिकित्सकों की राय है कि घर से बाहर ना निकलें, किसी कोविड रोगी के हाल जानने के लिए कत्तई अस्पताल ना जावें। इससे न सिर्फ आप संक्रमण फैलाएंगे, बल्कि अपना जीवन भी खतरे में डाल रहे है।