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बुध पुर्णिमा — भगवान बुध का जन्म उत्सव लघु ग्रहण अधिक चमक और सकारात्मकता का संदेश देगा

पटना , (अनमोल कुमार) ओम एक्सप्रेस
26 मई 20 21 दिन बुधवार को बुध पुर्णिमा का चंद्रमा देश में उप छाया के साथ उदित होगा परंतु जब वह क्षितिज के ऊपर आएगा तो सुपरमून बन जाएगा और चंद्रमा का चमक हॉनर पूर्णिमा की अपेक्षा ज्यादा चमकदार होगी
राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित विज्ञान प्रसारक सारिका पारू के अनुसार इस वर्ष के दूसरे सुपरमून मैं इस पृथ्वी से नज़दीकियां बढ़ जाएगी l यह दूरी पृथ्वी से 357462 किलोमीटर की रह जाएगी l नजदीक आने से पूनम का यह चांद 14% बढ़ा और 30 प्रतिशत ज्यादा चमकीला दिखेगा l 26 अप्रैल को हुए सुपरमून की तुलना में इस बार चंद्रमा 157 किलोमीटर पृथ्वी से नजदीक होगा ।
उन्होंने यह भी बताया है कि पश्चिमी देश में वहां के खेलने वाले फूलों के कारण इस चंद्रमा को फ्लावर मून का नाम दिया जाएगा सारिका ने मानचित्र के नक्शे से समझाया कि पूर्वी भारत में उदित होते समय चंद्रमा को आंशिक ग्रहण लगेगा l बिहार में इस ग्रहण का उपचाया रहेगी जिससे चंद्रमा की चमक मे अंतर दिखेगा l खाली आंखों से देखने में पहचानना कठिन होगा l संध्या में 7 . 19 मिनट के समाप्त होते हैं चंद्रमा की चमक 30% से ज्यादा होगी जो इस साल का सुपरमून बन जाएगा ।

– भगवान बुध जन्म उत्सव – एक परिचय

वैशाख माह की पूर्णिमा को बुद्धपूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है ।इस दिन भगवान बुध का जन्म नेपाल के लुबनी वन नामक स्थान पर हुआ था । जन्म के समय इनका नाम सिद्धार्थ रखा गया ।मोह माया से विरक्त होकर भगवान बुध बोधगया नावा का स्थान पर साधना लीन होकर ज्ञान की प्राप्ति की थी । बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बोधगया नाम का स्थान गौतम बुध के जीवन से संबंधित सर्वाधिक महत्वपूर्ण किस स्थल है ।यहां महाबोधि मंदिर के अलावे बौद्ध धर्म से जुड़े कई देशों का आकर्षक मंदिर भी स्थापित है । उन्होंने अपना पहला धर्म प्रचार उत्तर प्रदेश के सारनाथ में की थी ।भगवान बुध एक अध्यात्मिक ग्रुप है जिनकी शिक्षा से बौद्ध धर्म की स्थापना हुई । अधिकांश इतिहासकार ने बुद्ध के जीवन काल को 563-483 ई. पूर्व के मध्यकाल के रूप में जाना जाता है । इनकी मृत्यु उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में हुआ था ।

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