आखिर विश्व स्वास्थ्य सन्गठन और चीन ने कुछ सप्ताह बाद एक नए किस्म के कोरोना वायरस का पता लगाने की घोषणा की और पाया गया कि यही वायरस निमोनिया के लिए जिम्मेदार है। यह संक्रमण बड़ी तेजी से, बल्कि अभूतपूर्व ढंग से फैला और उसकी जो प्रतिक्रिया हुई, वह भी उतनी ही अभूतपूर्व थी। तेजी से फैल रही इस महामारी को लेकर दो सवाल तुरंत उठे। पहला, यह रोग कितना जानलेवा है? और दूसरा, क्या इसको नियंत्रित किया जा सकता है? ताजा आंकडे़ बता रहे हैं कि इसने अभी तक तीन सौ से ज्यादा लोगों की जान ले ली है और इससे संक्रमित होने वालों की संख्या हजारों में है। इस रोग की वजह से मृत्यु-दर का ताजा आकलन दो प्रतिशत का है, जैसे-जैसे इसके नए मामले सामने आएंगे, यह आंकड़ा बदल सकता है।
कोरोना वायरस की संरचना मूठ लगी हुई तीलियों जैसी होती है। इसमें एक काफी बड़ा आरएनए जीनोम होता है, जिसकी अपने जैसे नए वायरस बनाने की रणनीति अनूठी होती है। यह पक्षियों से लेकर स्तनधारी जंतुओं तक को कई तरह के रोग देता है और इंसानों की श्वास नली को संक्रमित कर देता है। पिछले सप्ताह द लांसेट पत्रिका ने लिखा था कि चीन ने इसकी जीनोम सरंचना की थाह २०१९ में ही पा ली थी। इसका जीनोम यह भी बताता है कि इंसानों को इसने हाल-फिलहाल में संक्रमित करना शुरू किया है। बाद में अमेरिका और फ्रांस ने भी इसका अध्ययन किया।
भारत को इस वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल से सीखने के लिए बहुत कुछ है। यह तो समय ही बताएगा कि वुहान शहर को बंद करने का फैसला प्रभावपूर्ण साबित हुआ या फिर महज तानाशाही भरा। लेकिन अगर यह तरीका खतरनाक वायरस के संक्रमण को रोकने में उपयोगी साबित हुआ, तो भारत में भी ऐसा फ्रेमवर्क और ऐसी क्षमता तैयार करने की जरूरत होगी कि जरूरत पड़ने पर ऐसे किसी सख्त फैसले को बडे़ पैमाने पर लागू किया जा सके। अभी जो हमारा स्वास्थ्य नेटवर्क है, वह कम संख्या में रोगों के मामलों से तो निपट सकता है, लेकिन अगर किसी क्षेत्र में कोई संक्रमण काफी तेजी से फैलता है तो उससे किस तरह निपटा जाएगा यह अभी स्पष्ट नहीं है।

