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भारत में अशिक्षित कामगारों  की भरमार

आपने कई मैकेनिक देखे होंगे तो उनके पास हाथ और गाड़ी पोछने का जो कपड़ा होता है वह बिल्कुल नीरू गंदा होता है। जब उससे हम गाड़ी उठाते हैं तो उस पर उसके हाथ में कई जगह निशान मिलेंगे। इसी तरह सुतार को काम करते हुए देखेंगे तो कील दीवाल में ठोकते ठोकते थोड़ी देर बाद हथोडी का उल्टा सिरा दीवाल पर ठोक कर हथौड़ी ठीक करता दिखेगा। अनेक मजदूर को देखेंगे काम करते वक्त तमाकू खाएगा तो आज पास ही पिक कर लेगा। मजदुर को कुछ खाने की देंगे तो वह हाथ को हल्का सा झटका देगा और गंदे हाथों से ही खा लेगा। आपके यहां सफाई कर्मी आते होंगे कई जगह वह टॉयलेट साफ करेते हैं उनसे नल आदी पर पानी के छींटे वैसे के वैसे रह जाते हैं उसे साफ कपड़े से नही पोछते है।इसी प्रकार गाड़ी धोने वाले सड़क पर पानी और गंदगी दोनों छोड़ देंगे। मकान बनाने के सिविल वर्क में मजदूर मिट्टी लगी हुई रेती गिट्टी में ही सीमेंट का मिक्स बनाता है। तैयार मिक्स को लंच की छुट्टी में पड़ा रहने देगा आप आजमा लीजिए जब भी कही मकान बन रहा हो और प्लास्टर हो रहा हो तो उस पर एक मग पानी फेंक कर देखो आपको अनेकों हेयर क्रैक दिख जाएंगे कारण सीमेंट मिक्स की पहली स्ट्रैंथ 27 मिनट की होती है। इसी तरह रोड पर डामर का कार्य होगा तो उसको नियमानुसार कभी आपने करते हुए नहीं देखा। इन सब की सबसे बड़ी वजह है कि हमारे यहां स्किल कामगार की कमी। सरकार और प्राइवेट सेक्टर को चाहिए कि जगह जगह ऐसे इंस्टिट्यूट खोलें जहां हफ्ते 15 दिन में कामगार को बेसिक ट्रेनिंग दी जाए ताकि वह प्रथम दृष्टया ट्रेंड रहे। और कहीं काम पर जाए तो अपने साथ पूरे औजार व सफाई के लिए कपड़े लेकर जाए तभी घटिया निर्माण रुकेगा। भारत एक विकासशील देश है जहां निरंतर निर्माण हो रहे हैं।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, वास्तुविद्)

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