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भारत में कोरोना वायरस का सिर्फ एक मरीज लोगों को कोरोना वायरस को लेकर भय बनाने की जरूरत नहीं-डा. ओ.पी. कालरा

हर्षित सैनी
रोहतक। कोरोना वायरस अभी तक भारत में सिर्फ एक मरीज में सामने आया है, वो भी केरल में। ऐसे में लोगों को इसको लेकर भय बनाने की जरूरत नहीं है, सिर्फ सावधानी ही काफी है। सामान्य फ्लू के लक्षणों को कोरोना वायरस ना समझें और बिना किसी हड़बड़ाहट के अच्छे चिकित्सक की सलाह लें। यह कहना है पंड़ित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डा. ओ.पी. कालरा का।
डॉ. कालरा ने आमजन को संबोधित करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पीजीआईएमएस रोहतक देश का प्रतिष्ठित कालेज होने के नाते मरीजों को उच्च गुणवता की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाता है।
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कोरोना वायरस के चीन में मामले सामने आने के चलते व देश में भी एक कोरोना वायरस का मामला मिलने पर संस्थान ने तुरंत प्रभाव से प्राथमिक कदम उठाते हुए आपातकालीन विभाग के सी ब्लॉक को आईसोलेशन वार्ड बना दिया है।

इसके साथ ही यहां पर पल्मोनरी क्रिटिकल केयर के अध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी के नेतृत्व में डॉ. दीपक जैन व डॉ. पवन कुमार सिंह को नोडल अफसर की जिम्मेदारी सौंपी गई है व उनके साथ डॉ. मंजूनाथ व डॉ. दीक्षा को किसी भी आपातस्थिति पर नजर बनाए रखने के आदेश जारी कर सभी जरूरी सामान खरीदने के आदेष जारी कर दिए गए हैं।
डॉ. कालरा ने कहा कि यदि कोई भी कोरोना वायरस का मामला संस्थान में आता है तो संस्थान पूर्ण रूप से उसका इलाज तत्परता के साथ करेगा। कुलपति ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि इस वायरस को लेकर किसी भी प्रकार की भय की स्थिति ना बनाएं और सावधानी रखें क्यों इसमें सावधानी ही खुद का बचाव है। शनिवार को निदेशक डॉ. रोहताश यादव ने चिकित्सा अधिक्षक डॉ.एम.जी. वशिष्ठ व अन्य अधिकारियों की मिटिंग लेकर सभी जरूरी सामान खरीदने के निर्देश दिए।
संक्रमित मरीज के संपर्क में आने पर क्या करें
लोगों की जिज्ञासाओं को शांंत करते हुए डॉ. ओ. पी. कालरा ने बताया कि यदि हम किसी कोरोना वायरस संक्रमित मरीज के संपर्क में आ जाते हैं तो अपने स्वास्थ्य की कम से कम 14 दिन तक निगरानी रखें और इन लक्षणों का ध्यान रखें

1. दिन में दो बार थर्मामीटर से अपने शरीर का तापमान नोट करें।
2. खांसी, सांस की तकलीफ, कंपन, जुकाम,शरीर में दर्द, गला खराब, सिरदर्द, दस्त या उल्टी में से कोई भी लक्षण दिखे तो पीजीआईएमएस के आपातकालीन विभाग के सी ब्लॉक में चिकित्सक को दिखाएं। संक्रमित पाए जाने पर चिकित्सक आपको घर या अस्पताल में कम से कम 14 दिन तक आइसोलेशन में रखेंगे।
3. घर से बाहर निकलने से पहले एन 95 मास्क जरूर पहनें।
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संक्रमित होने पर किसको ज्यादा खतरा
डॉ. कालरा ने बताया कि वैसे तो खतरा सभी संक्रमित मरीजों को होता है लेकिन बुजुर्गों जिन मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, जिनको मधुमेह, किडनी की बिमारी, कैंसर हो या गर्भवती महिला हो, उनको खास बचाव रखने की जरूरत है।
जांच किसकी होनी चाहिए
डॉ. ओ.पी. कालरा ने बताया कि जो भी व्यक्ति 1 जनवरी के बाद चाइना से वापिस देश में आया हो या ऐसे किसी व्यक्ति के संपर्क में रहा हो। उन व्यक्तियों की जांच होनी चाहिए, जिसमें उनके थ्रोट/नेसल स्वैब/बलगम की जांच की जानी चाहिए।
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क्या इस बीमारी का इलाज है ?
कुलपति ने बताया कि अभी तक इसके इलाज की कोई एंटी वायरल दवा या टीका उपलब्ध नहीं है, परंतु मरीज की बीमारी के हिसाब से उसका इलाज जरूर किया जा सकता है।
कोरोना वायरस क्या है?
उन्होंने बताया कि वायरसों का एक बड़ा समूह है कोरोना जो जानवरों में आम होता है। यह वायरस जानवरों से लेकर इंसानों तक पहुंच जाता है। अब एक नया वोहान कोरोना वायरस, सार्स वायरस की तरह है जिसने सैकड़ों को संक्रमित किया है। इसकी शुरुआत चीन के हुवेई प्रांत के वुहान शहर के एक सी-फूड बाजार से ही हुई मानी जा रही है।

कोरोना वायरस के लक्षण
1. सिरदर्द
2. नाक बहना
3. खांसी
4. गले में खराश
5. बुखार
6. अस्वस्थता का अहसास होना
7. छींक आना, अस्थमा का बिगडऩा
8. थकान महसूस करना

कोरोना वायरस से बचाव के उपाय :-
– अभी तक इसकी कोई वैक्सिन नहीं है इसलिए इंफैक्शन से बचाव ही एकमात्र रास्ता है।
– सी-फूड से दूर रहें।
-साफ-सफाई का ध्यान रखें।
-कुछ भी खाने से पहले अपने हाथ कम से कम 20 सैकेंड तक साबुन से अच्छी तरह साफ करें।
-जहां हाथ धोने के लिए पानी ना मिले वहां कम से कम 60 प्रतिशत एल्कोहल बेसड हैंडरब का प्रयोग करें। अपने साथ हैंड सेनिटाइजर हमेशा रखें।
– सार्वजनिक स्थल पर कुछ भी छूने के बाद हाथ साफ किए बिना उन्हें अपने चेहरे और मुंह पर ना लगाएं।
-बीमार लोगों की देखभाल के दौरान अपनी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें।
-जिन्हें सर्दी या फ्लू जैसे लक्षण हों, उनके साथ करीबी संपर्क बनाने से बचें।
-मीट और अंडों को अच्छे से पकाएं।
-जंगल और खेतों में रहने वाले जानवरों के साथ असुरक्षित संपर्क न बनाएं।
– खांसते व छींकते हुए हमेशा मुंह व नाक अवश्य ढक़ें।
– जब भी बीमार हों, घर के अंदर ही रहें।

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