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मन अस्वच्छ तो तन अस्वस्थ : साध्वी सौम्यप्रभा


बीकानेर (कविता कंवर राठौड़ )। देह पुष्टि के लिए भोजन चाहिए और आत्मपुष्टि के लिए परमात्मा का पूजन, ध्यान, स्वाध्याय, वंदन और तप करना चाहिए। उक्त प्रवचन शनिवार को रांगड़ी चौक स्थित पौषधशाला में साध्वी सौम्यदर्शना ने व्यक्त किए। साध्वीश्री ने कहा कि मन की अस्वच्छता के कारण तन की अस्वस्थता रहती है इसलिए हमें प्रतिक्रमण व कायोत्सर्ग धर्म-ध्यान करना चाहिए। इस दौरान वंदन के प्रकार तथा महत्ता बताई गई। इससे पूर्व साध्वी अक्षयदर्शना ने कहा कि परमात्मा की पूजा करना, ध्यान करना दिखावा नहीं बल्कि सर्वश्रेष्ठ साधना है। चातुर्मासिक इस अवधि में त्याग पर विशेष ध्यान दें। साध्वीश्री ने मंदिर में अष्टपूजा, जल अभिषेक तथा मंदिर में हमारा व्यवहार कैसा हो इस पर व्याख्यान दिया। श्री जैन तपागच्छ श्वेताम्बर श्रीसंघ के जितेन्द्र कोचर ने बताया कि शनिवार को संघपूजा का लाभ मूलचंद पुष्पा देवी सुरेन्द्र जैन बद्धाणी परिवार द्वारा लिया गया। कोचर ने बताया कि रविवार को मासिक संक्रांति महोत्सव मनाया जाएगा जिसके लाभार्थी मोहनलाल माणकचंद शांतिलाल अजय सेठिया परिवार है। रविवार सुबह साध्वीश्री द्वारा बच्चों को मंदिर में पूजन करने की विधि सिखाई जाएगी तथा दोपहर में बाल शिक्षण शिविर का आयोजन होगा।

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