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मसाज सेंटर के नाम पर वेश्यावृत्ति!


-राजधानी के पॉश क्षेत्रों में बड़ी संख्या में चल रहे इस तरह के सेंटर,नशे की सामग्री भी वहां रहती है उपलब्ध
-थाना पुलिस महीने में एक बार आती है, क्या वह चेक करने आती है? या…

जयपुर, (हरीश गुप्ता)। मौज मस्ती के लिए पटाया या बैंकॉक जाने की अब कोई जरूरत नहीं है। उसका कारण है, यही सब कुछ व्यवस्था उपलब्ध हो जाती है। राजधानी के कई पॉश इलाकों में चल रहे मसाज सेंटर उसके जीवंत उदाहरण है।
सूत्रों की मानें तो राजा पार्क, जवाहर नगर, सी स्कीम, वैशाली नगर सहित जयपुर के कई पॉश इलाकों में इस तरह के मसाज सेंटर चल रहे हैं। यहां किस तरह की मसाज होती है, आसपास रहने वालों की व्यथा सुन लें, तो लोग पुलिस व सरकारी तंत्र को कोसते मिल जाएंगे। सबसे बड़ा कारण है मसाज सेंटर कोई साधारण व्यक्ति तो नहीं चला सकता। वह दबंग होता है इसलिए कोई पंगा लेने के डर से शिकायत भी नहीं करता।
सूत्रों ने बताया कि मसाज सेंटर में हर कमरों में एसी लगे हुए हैं तथा वहां के फ्रिज़ में नशे की सामग्री भी उपलब्ध है। वह अलग बात है कि दाम कुछ ज्यादा है। मसाज सेंटर में दो से तीन युवतियां काम करती हैं तथा दो से तीन ही उन्होंने बाउंसर रखे होते हैं। सूत्रों ने बताया कि एक मसाज सेंटर हर महीने 30 से ₹40 हजार की बंधी देता है।देता किसे है यह उसने नहीं बताया। आसपास रहने वालों का कहना है पुलिस की गाड़ी महीने में एक बार आती है उसके अलावा कभी भी नहीं आती है। यह और है कुछ सेंटर रात में भी चलते हैं। पुलिस का तो समझ आता है, पुलिस के पास बहुत काम है, लेकिन आबकारी विभाग को क्या हो गया, वहां शराब बेची जाती है, फिर आबकारी विभाग क्यों कार्रवाई नहीं करता?
सूत्रों की मानें तो इस तरह के सेंटर से कुछ दूरी पर अंडे के ठेले, पान, बीड़ी-सिगरेट वाले भी देर रात तक खड़े मिल जाते हैं। पुलिस की रात्रि गश्त का भी इन्हें कोई खौफ नहीं है, क्योंकि गश्त की गाड़ी रूकती नहीं, निकल जाती है। सेंटर पर सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं रिसेप्शन पर, पुलिस देखे तो पता चल जाता है कितने युवाओं का भविष्य खराब कर रहे हैं ऐसे सेंटर।
सूत्रों ने बताया कि सेंटर में जाने के बाद मसाज कराने के बाद युवतियों का अगला सवाल यह होता है की एक्स्ट्रा सर्विस की रिक्वायरमेंट है क्या? अगर सामने वाला कहता है है, तो उसका उसका सवाल होता है, एच जे (हैंड जॉब) ₹500, बीजे ब्लो हजार रुपए और बॉडी टू बॉडी ₹2000। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जब सब लोगों को यह नजर आ रहा है तो पुलिस को नजर क्यों नहीं आ रहा?

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