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मातृशक्ति को आत्म संरक्षण मे सक्षम बनाना समिति का ध्येय : मा. शांताक्का जी

बीकानेर।महिलाओं के सबसे बड़े संगठन राष्ट्र सेविका समिति शाखाओ सहित अनेक कार्यो व गतिविधियो का संचालन करते हुए महिलाओं को शारीरिक ,मानसिक और बौद्धिक रूप से सक्षम बनाने मे लगा है, 1936 में विजयदशमी के दिन नागपुर में वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर के प्रयास से संगठन की स्थापना हुई, अपने आरम्भ से अब तक यह संगठन मातृशक्ति और बालिकाओं के बीच सतत कार्य कर रहा है नागपुर जहां समिति का केंद्रीय कार्यालय है उसी नागपुर से चला समिति का कार्य देशभर के सभी प्रांतों से होता हुआ सभी जिलों तक पहुंच चुका है जोधपुर प्रांत में लगभग सभी खंडों तक पहुंच चुके, राष्ट्र सेविका समिति के कार्य को, मजबूती प्रदान करने हेतु संगठनात्मक प्रवास पर माननीय शांता अक्का जी प्रांत के प्रवास पर हैं। प्रवास के क्रम में बीकानेर आगमन पर बीकानेर और गंगानगर विभाग की शाखाओं का एकत्रीकरण रखा गया। “शौर्य वंदन” नामक कार्यक्रम में सेविका बहनों ने नियुद्ध , दंड प्रदर्शन, गोपुर और योग व्यायाम के कार्यक्रम प्रस्तुत किये कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रूप में समाजसेवी श्रीमती उषा जी पारीक व अध्यक्ष के रूप श्रीमती अंबिका राठौड़ बाव (President, BSF Family’s Welfare) रहीं अध्यक्षीय उद्बोधन में श्रीमती अंबिका जी ने भारत की सीमाओं के प्रहरी बीएसएफ के द्वारा किए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी दी।साथ ही उन्होंने बताया की भारत की सुरक्षा में खड़े सीमा प्रहरी घर की चिंता को लेकर परेशान नहीं हो इसके लिए परिवार की महिला मानसिक रूप से मजबूत होती है। वह अपने बच्चों को भी तनाव से मुक्त रखती है और सीमा पर डटे हुए प्रहरी को भी चिंता मुक्त रखती हैं ।
राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख माननीय शांताअक्का जी ने अपना पथ प्रदर्शक पाथेय प्रदान करते हुए कहा की युवतियों को हर क्षेत्र में मजबूती के साथ आगे बढ़ना है साथ ही समाज और राष्ट्र के लिए भी कार्य करना है। अपना संगठन महिलाओं में शाखाओ के माध्यम से संस्कार प्रदान करते हुए, राष्ट्रभक्ति का भाव भी पुष्ट है मातृशक्ति को स्वसंरक्षणक्षम बनाने हेतु समिति द्वारा कई तरह के कार्यक्रम संचालित है। वं. मौसी जी के कथन “कि महिलाओं में अष्टभुजा देवी जैसी शक्ति होती है” को स्मरण कराते हुए अक्का ने कहा वर्तमान समय में पुरुषों को और महिलाओं को दोनों को अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाने की जरूरत है। अब परिवारों में पहले की तरह संस्कार व्यवस्था क्षीण हुई है। परिवार संस्कार कानून से नहीं कुटुंब प्रबोधन से ही संभव है उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भूमि और वनस्पति परस्पर एक दूसरे पर आश्रित हैं उसी प्रकार हर व्यक्ति और मातृभूमि मे परस्पर अंतर्संबंध है हमारे कर्तव्य हमारे मातृभूमि के प्रति समर्पण भाव को जगाते हैं और मातृभूमि हमें संरक्षण व जीवन यापन व्यवस्थाए प्रदान करती हैं। हमें अपनी मातृभूमि के लिए कुछ करना चाहिए यह हमारा कर्तव्य है केवल अन्न खाते अर्थात दोहन ही करते रहना नहीं है कारगिल की घटना का विवरण देते हुए उन्होंने वहां के समिति की बहनों का टैक्सी ड्राइवरों के साथ मिलकर सियाचिन मे सैनिको के लिए किए गए कार्य की जानकारी दी
बीकानेर विभाग का यह शौर्य वंदन कार्यक्रम आदर्श विद्या मंदिर, व्यास कॉलोनी में, वंदनीय प्रमुख संचालिका माननीय शांता का जी के सानिध्य में संपन्न हुआ। इसमें बीकानेर और गंगानगर की 125 बहनों की भागीदारी रही। बड़ी संख्या में बीकानेर के गणमान्य जन और मातृशक्ति भी यह कार्यक्रम देखने के लिए उत्सुकता के साथ उपस्थित रहे गंगानगर विभाग कार्यवाहिका सिमरजीत कौर ने अध्यक्ष महोदया का व महानगर कार्यवाहिका ममता जी पुरोहित ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया, बीकानेर विभाग कार्यवाहिका श्रीमती चंद्रकला चौधरी ने वंदनीय प्रमुख संचालिका जी को श्रीफल भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती पीयूष विग ने किया और अंत में बीकानेर विभाग की संपर्क प्रमुख श्रीमती अभिलाषा जी ने आभार व्यक्त किया कार्यक्रम में जोधपुर प्रांत की प्रांत कार्यवाहिका डॉ• सुमन रावलोत, प्रांत प्रचारिका ऋतु शर्मा व प्रांत संपर्क प्रमुख श्रीमती कृष्णा द्विवेदी भी उपस्थित रहीं।

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