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मुंबई में बढ़ रहे है निराश्रित बुजुर्गो पर अत्याचार : अशोक भाटिया


अत्यंत दुख : की बात है कि मुंबई में बुजुर्गों पर अत्याचार , ठगी ,हत्या के मामले बढ़ते ही जा रहे है | हाल ही में एक समाचार पत्र के अनुसार कुर्ला निवासी 59 वर्षीय पंडित एलिंजे को अज्ञात लोगों साइबर क्राइम का निशाना बना कर 4.60 लाख रुपये का चुना लगाया |शिवाजी पार्क में 71 वर्षीय रत्ना शेट्टी को फर्जी पोलिस कर्मियों ने लूट लिया और बोरीवली में 70 वर्षीय वामन जोशी की हत्या साबित करती है की अब बुजर्गो के लिए असुरक्षता बढ़ गई है | ये तो हाल ही के उदहारण है इसके पहले मुंबई के लोखनवाला क्षेत्र के पॉश इलाके में एक निराश्रित बुजुर्ग महिला का कंकाल मिला जिसकी मृत्यु की खबर पोलिस को सवा साल बाद मिली । अधिकतर इसे हत्या का मामला माना जा रहा है । किसी ने उसकी हत्या कर बाहर से ताला बंद कर दिया होगा कि बात पुरानी पड़ने पर जायदाद हड़प ली जाएगी । इससे लगता है कि मुंबई व उसके आस – पास के क्षेत्र में ऐसी घटनाये आम होती जा रही है ।2018की एक रिपोर्ट के अनुसार मुंबई में बुजुर्गों के खिलाफ सबसे अधिक आपराधिक मामले सामने आए हैं |इस रिपोर्ट में बताया गया है है कि मुंबई में बुजुर्गो के खिलाफ 10 43 मामले दर्ज किए गए है , जो देश के किसी अन्य शहरों के मुकाबले बहुत ज्यादा है |

आज के दौर में सयुक्त परिवारों का विघटन , नौकरी कि सिलसले में बच्चों का बाहर चले जाना बुजुर्गो के लिए एकाकीपन और असुरक्षता के बड़े कारण का दौर उभरा है । वैसे पुलिस ने कई बार वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अभियान चलाया है । पुलिस के अनुसार , यदि लोग नौकरों को रजिस्टर करवा दें , तो नौकर अपराध करने से डरेंगे । पुलिस को शिकायत रहती है कि बार – बार अपील करने के बावजूद उन्हें अकेले रहने वालों से समुचित सहयोग नहीं मिल पा रहा है । दूसरी तरफ बुजुर्गो का सोचना है कि पुलिस उनके प्रति उपेक्षापूर्ण रवैया अख़्तियार कर रही है । बहुत से बुजुर्गो को पुलिस पर विश्वास ही नहीं है । वे पुलिस में अपना ब्योरा दर्ज करवाने के लिए इस कारण भी डरते है कि पुलिस जानकारी लीक कर देगी । पुलिस और बुजुर्गो के एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराने से इस समस्या का कोई हल नहीं निकलने वाला । बुजुर्गो को अपना माहौल सुरक्षित बनाने के लिए खुद पहल करनी चाहिए । डबल डोर दरवाजे होना चाहिए , ताकि एक डोर खोलने पर सामने वाले को देखा जा सके । सोच समज़ कर सफाई कर्मचारी , प्लंबर , एलेक्ट्रिशियन ,काम करने वाली बाइयों – नौकरों को प्रवेश देना चाहिए । पुलिस को भी नहीं भूलना चाहिए कि हर नागरिक की सुरक्षा की बुनियादी ज़िम्मेदारी उसी की है । उसे बुजुर्गो की विशेष जरूरतों के प्रति ज्यादा संवेदनशील रहना चाहिए ।

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