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मुक्तिधाम मुकाम में 536 वां बिश्नोई धर्म स्थापना दिवस

नोखा। मुक्तिधाम मुकाम में श्री गुरू जम्भेश्वर भगवान की समाधि स्थल आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ कोविड-19 के नियमों की पालना के तहत 21 मार्च 2020 के बाद रविवार को खोला गया। इस अवसर पर 536 वां बिश्नोई धर्म स्थापना दिवस की संध्या पर समाधि मंदिर परिसर पर समाज के विद्वान पूजनीय संत महात्माओं द्वारा जागरण संत्सग का कार्यक्रम में मुकाम पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी रामानंद जी ने जाम्भोजी की अमृतमयी शब्दवाणी 535 वर्ष पहले उन्नतीस नियमों की आचार संहिता आज भी वैज्ञानिक दृष्टि से प्रकृति पर्यावरण जीव जंतु एवं मानव मात्र के कल्याण के लिए उपयोगी है। स्वामी महंत रामाकृष्ण जी समराथल धोरा, हनुमानदास मेघावा, स्वामी प्रेमदास सभी ने साखियां एवं वाणी के माध्यम से उपदेश दिया।

अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रामस्वरूप मांझू ने आज दिनांक 08.11.2020 536 वां बिश्नोई धर्म स्थापना दिवस के अवसर पर सुबह हवन यज्ञ के बाद जाम्भोजी के जयकारे के साथ समाज के गणमान्य पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति में ध्वजा रोहण कर कार्यक्रम का शुभ आरम्भ किया। मुकाम पीठाधीश्वर स्वामी श्री रामानंद आचार्य व राष्ट्रीय अध्यक्ष रामस्वरूप मांझू, सीताराम बिश्नोई महासचिव, सुशील भादू सचिव, सुलतान धारणियां, कृष्ण सीगड़ गौशाला अध्यक्ष, रंगलाल सुथार महासचिव अ.भा.ज.सेवकदल, रामस्वरूप धारणियां कोषाध्यक्ष अ.भा.बि.महासभा, जगदीश कड़वासरा प्रधान बिश्नोई सभा हिसार एंव विक्रम सिंह बिश्नाई, बनवारीलाल भादू, वेदप्रकाश कड़वासरा, कालूराम सियाग, पुनमचंद लोहमरोड़ द्वारा झण्डी दिखाकर पैदल शोभा यात्रा मुकाम से समराथल धोरा के लिए रवाना की। सभी विद्वान संत महात्माओं के पावन सानिध्य में कीर्तन अमृतवाणी के साथ समराथल रवाना हुए। समराथल धोरा तपो भूमि पर आज से ठीक 535 वर्ष पहले दिव्य कलश का आह्वान कर अमृतमयी शब्दवाणी से अमृत पाहल बनाकर पाहल पिलाकर बिश्नोई धर्म का पंथ प्रवर्धन किया। आज ही का दिवस था।

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