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मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के त्रिस्तरीय सुनवाई निर्देशो का हश्र: हेम शर्मा

बीकानेर। जिला कलेक्टर भगवती प्रसाद कलाल ने खारी चारणान में त्रिस्तरीय जन सुनवाई में ग्रामीणों की समस्याएं सुनी। ग्रामीणों को योजनाओं की भी जानकारी दी।
त्रिस्तरीय जनसुनवाई के दौरान प्राप्त प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण के आदेश भी दिए। वैसे मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राज्य सरकार की ओर से जन भावना के अनुरूप पारदर्शिता और संवेदनशील वातावरण में आम जन की समस्याओं की सुनवाई एवं त्वरित समाधान की त्रिस्तरीय व्यवस्था मुख्य सचिव उषा शर्मा की निगरानी में चल रही है।
जिला कलेक्टर ने खारी चारणान में जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों की पेतृत्व कृषि भूमि जिसे उपनिवेशन क्षेत्र में शामिल कर लिया गया है उसकी खातेदारी सनद नहीं मिल पाने की स्थिति से अवगत करवाया। मौके पर कलक्टर ने हल्का पटवारी को बुलाकर कारण जाना। बताया गया कि आवंटन सलाहकार समिति की बैठक नहीं होने से खातेदारी नहीं दी जा रही है। यही शिकायत जिला स्तरीय जन सुनवाई में दो बार रिकार्ड में दर्ज है। संभागीय आयुक्त नीरज के पवन ने डेढ़ वर्ष में सात बार उपनिवेशन विभाग के अधिकारियों को समाधान करने के लिखित निर्देश दिए है। वे जब खुद उपनिवेशन विभाग में आयुक्त थे तब खातेदारी देने की कार्रवाई तो पूरी कर दी, परंतु आवंटन सहलाकर समिति की मीटिंग करके खातेदारी सनद जारी नहीं हुई। खातेदारी देने के प्रकरण जिला स्तरीय जन सुनवाई, संभागीय आयुक्त की जन सुनवाई और अब पंचायत स्तरीय जन सुनवाई के बाद भी आदेश निर्देशों में अटकी हुई है। प्रभारी सचिव आलोक गुप्ता ने भी इसे जिले की जन सुनवाई की समीक्षा में लिया है। राज्य सरकार की ओर से जनसुनवाई की त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत महीने के पहले गुरुवार को ग्राम पंचायत, द्वितीय को पंचायत समिति और तीसरे को जिला स्तर पर आमजन की समस्याएं सुनी जाती हैं। प्रत्येक विभाग के अधिकारी इनके निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश है। जिला कलक्टर यह बात संबध विभागों को कह चुके हैं। वे जन सुनवाई के दौरान मिली परिवेदनाओं को संबध विभागों भेज देते हैं। उपनिवेशन विभाग के अधिकारी कितने जिम्मेदारी से काम करते हैं मुख्य सचिव के देखने की बात है अन्यथा अशोक गहलोत की मंशा के विपरीत परिणाम आने वाले है। यह बात सही है कि राज्य सरकार द्वारा इसकी नियमित समीक्षा की जाती है। इस अनदेखी के जिम्मेदार अफसरों को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। खारी चारणान में जनसुनवाई के दौरान जिला स्तरीय जन सुनवाई वाले रिकार्डेड परिवेदना फिर ग्राम पंचायत स्तर पर दी गई। यह सोचने वाली बात है कि कितना निस्तारण होता है या जनसुनवाई की औपचारिकता होती है। खारी में जनसुनवाई दौरान 31 परिवेदनाएं रिकार्ड में ली गई है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों की प्रशासनिक स्तर पर क्या हश्र होता है, कलक्टर से लेकर मुख्य सचिव तक क्रियान्वयन कितना प्रभावी है।

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