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मुश्किल की घड़ी में आध्यात्मिक शिक्षा से मिलता है बल-पोखरियाल

नये युग के लिए नयी शिक्षा विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार में शामिल हुए शिक्षाविद

सुधांशु कुमार सतीश – ओम एक्सप्रेस

आबू रोड (राजस्थान) । केंद्रीय शिक्षामंत्री रमेश पोखरियाल ने कहा कि आज जिस संकट के दौर से गुजर रहे हैं। यह कभी सपने में भी नहीं था। परन्तु कभी हमने यह नहीं सोचा था कि हम घरों में होंगे और हमारे पास बहुत समय होगा। ऐसे दौर में खुद को मैनेज करने के लिए आध्यात्मिक शिक्षा ही कारगर है। जो व्यक्ति किसी भी प्रकार के अवसाद, चिंता और दु:ख से बचाने में मद्दगार साबित होता है। वे ब्रह्माकुमारीज संस्थान द्वारा ई कान्फ्रेस में सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि भारत देश की छवि, निष्ठा, ईमानदारी नैतिक मूल्यों की नींव पर खड़ी है। जो भारत में दी जाने वाली आध्यात्मिक शिक्षा पर आधारित है। अपने माता-पिता, बच्चों और परिवार के सदस्यों को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए इसी आध्यात्मिक शिक्षा की जरूरत होती है। यही हमारी पहचान और देश धरोहर है। ब्रह्माकुमारीज संस्थान द्वारा जो नैतिक शिक्षा पूरे देश में दी जा रही है इससे निश्चित तौर पर लोगों में शांति और सुख का विकास होगा।
दिल्ली के शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि शिक्षा में कभी हमें यह नहीं पढ़ाया गया कि जब कभी हमारे पास पर्याप्त समय मिले तो कैसे रहना चाहिए? हम हमेशा कहते थे कि हमारे पास समय नहीं है। लेकिन जब परमात्मा ने हमारे पास पर्याप्त समय मिला तो एक अजीब सा तनाव महसूस हो रहा। उलझन हो रही, यह नही पता पड़ रहा कि इसे कैसे बितायें? यह सब कुछ ब्रह्माकुमारीज संस्थान में दी जाने वाली आध्यात्मिक शिक्षा में मिलता है। यह शिक्षा मनुष्य को अपनी तरक्की और विकास के लिए ज्यादा उपयोगी है। इसलिए इस लॉकडाउन में इस आध्यात्मिक शिक्षा का महत्व पता पड़ा।

कार्यक्रम में संस्थान की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने कहा कि हम आत्मा है और परमात्मा की संतान होने के नाते आपस में भाई-भाई है। इसलिए अपने इस भाव को जागृत अवस्था में रखने के लिए इस आध्यात्मिक शिक्षा की अति आवश्यकता है। परमात्मा ने यह राजयोग की शिक्षा इसी मकसद के लिए दी थी। ताकि जीवन में सुख और शांति का विकास हो।

इस अवसर पर यूजीसी के चेयरमैन प्रो0 धीरेन्द्र पाल सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का वजूद और उपयोगिता बनी रहे इसलिए भले ही लॉकडाउन है लेकिन इस तरह के आयोजनों से आध्यात्मिक सम्बल मिलता रहेगा। क्योंकि इससे जुड़ाव और बढ़ेगा। लोगों में आज इसकी अति आवश्यकता है। इसलिए जीवन में ज्ञान, ध्यान और राजयेाग को शामिल करना जरूरी है। इससे ही मनुष्य का मन विकसित होगा। एनसीईआरटी के सचिव मेजर हर्ष कुमार ने कहा कि बच्चों में जब प्रारम्भिक शिक्षा से ही मूल्यों के प्रति जागरूक किया जायेगा तो संस्कारी समाज का निर्माण हो सकेगा। यह अति आवश्यकता है। क्योंकि भौतिक समाज का निर्माण करना तो सहज है लेकिन श्रेष्ठ संस्कारी समाज का निर्माण करना उतना ही कठिन । इसके लिए राजयोग, मेडिटेशन अति आवश्यक है।

सम्मेलन में सम्बोधित करते हुए ब्रह्माकुमारीज संस्था के महासचिव बीके निर्वेर ने सभी का आह्वान किया कि हर कोई अपने परिवार और बच्चों में मानवीय मूल्यों को बढ़ावा दे। क्योंकि इससे ही मानव का जीवन सहज और सुन्दर होगा। इस अवसर पर शिक्षा प्रभाग के अध्यक्ष बीके मृत्युंजय, जीवन प्रबन्धन विशेषज्ञ बीके शिवानी समेत कई लोगों ने सम्बोधित किया।

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