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मोरखाणा में तेरापंथ सरताज का मंगल पदार्पण

विहार के दौरान नोखा की एसडीएम स्वाति गुप्ता एवं विधायक श्री बिहारीलाल जी विशनोई ने भी आचार्य श्री के दर्शन कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया।

मंगल देशना में आचार्यश्री ने कहा– आध्यात्मिक शास्त्रों में मोक्ष की बात आती है। मोक्ष आत्मा की सर्वोत्कृष्ट स्थिति होती है, जहाँ एकान्तिक सुख है वहा किसी प्रकार के दुःख के लिए अवकाश नहीं होता। हमारा परम लक्ष्य मोक्ष होना चाहिए। जीवन में मोह व राग-द्वेष के क्षय से ही मोक्ष प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। वितरागता की जब स्थिति आती है तब केवलज्ञान की प्राप्ति हो जाती है व हम सम्पूर्ण ज्ञान के धनी बन जाते हैं। ज्ञान का बड़ा महत्व होता है, ज्ञान के साथ श्रद्धा का भी योग होना जरूरी है। हम ऐसे ज्ञान का अर्जन करें जिस ज्ञान के द्वारा राग से विराग की ओर, कल्याण की ओर व वैर से मैत्री भाव की ओर अग्रसर हो सकें। साधना का मूल है – वीतरागता। प्रियता अप्रियता में भी समता का भाव हमारे भीतर विकसित होना चाहिए। ज्ञान का पुनरावर्तन व स्वाध्याय भी चले।

आचार्यश्री ने आगे कहा की आज हम मोरखाणा आये है। देवी–देवताओं का भी अपना स्थान होता है। संसारपक्ष में दुगड़ परिवार में मेरा जन्म हुआ। इस हेतु एक संबंध भी है। श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक धर्म के संस्कार पुष्ट होते रहे, मंगलकामना।
साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी ने भी सारगर्भित वक्तव्य दिया।

स्वागत के क्रम में नोखा विधायक श्री बिहारीलाल विशनोई, श्री डूंगरगढ़ विधायक श्री गिरधारी महिया, मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री सुरेशराज सुराना, महामंत्री नरेंद्र सुराना, मोहन सुराना, तेजकरण सुराना, धर्मचंद सुराना, भीखमचंद सुराना आदि अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे। सुसवाणी माता सेवा समिति, कोलकाता की बहनों ने गीत का संगान किया।

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