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यही है ना सुशासन मुख्यमंत्री जी ! हेम शर्मा

मुख्यमंत्री जी…! देखा पुलिस का सुशासन ? जैसा माजरा पुलिस और अपराधियों यानि सत्ता के दलालों का खाजूवाला थाने में सामने आया है कमोबेश सभी पुलिस थानों में ऐसा ही है। सत्ता के दलाल हर सरकार में ऐसी भूमिका निभाते हैं। वे सिपाही क्या थानेदार, एसपी और आईजी तक के साथ बैठे हैं। इसका दोष सीधा सीधा सरकार को जाता है, क्योंकि सरकार ऐसा होने दे रही है। प्रशासन में सत्ता और पार्टी के छूट भेय्याओं का अनुचित हस्तक्षेप रहता ही है। बीकानेर में तो सत्ताधारी नेता के परिजनों ने थाने और विभाग बांट रखे हैं। श्रीकोलायत या खाजूवाला में मंत्री के कहे बिना पटवारी नहीं हिलता। एक किसान ने पेमाइश सही नहीं होने को लेकर क्यों आत्महत्या की? मतलब साफ प्रशासन कायदे से काम नहीं करता। नेताओं का प्रशासन में अनुचित हस्तक्षेप रहता है। मुख्यमंत्री जी इसका ताजा प्रमाण खाजूवाला की यह घटना है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत देश का संजीदा नेता है। राष्ट्रीय राजनीति में पैठ है। संवेदनशीलता के कारण जनप्रिय है। फिर उनकी साख पर यह कालिख पोतने की छूट क्यों? पुलिस अधीक्षक तेजस्वी गोतम और आईजी ओम प्रकाश पासवान की अपने अधिनस्थों पर कितनी पकड़ है। इनकी प्रशासनिक कुशलता पर सीधा सवाल उठता है। यह घटना एक दिन में नहीं हुई है। अपराधी सी आई को गुलाब का फूल देता है। पुलिस की गाड़ी में फोटो खिचवाता है। सिपाहियों के साथ डांस करता है। किराए के मकान में सिपाहियों का आना जाना रहता है। यानि थाने में कोई नियम कायदे और पुलिस का कोई प्रोटोकॉल है भी क्या? एसपी, आईजी का फिर थानों पर कैसी निगरानी और नियंत्रण हुआ। थाने में सिपाही, सी आई जो मर्जी आए वो करो। न कोई पूछने वाला और न कहने वाला। पुलिस के सिपाही ही लडकी के साथ छेड़छाड़ करें तो आईजी साहब, एसपी साहब आपकी क्या साख रह गई है? सी आई को शिकायत करें और वो कार्रवाई नहीं करें तो बताओ आपके होने के क्या मायने हैं ? गैंग रेप और हत्या पुलिस की शह और मिलीभगत से हो तो आईजी और एसपी की जिम्मेदारी नहीं बनती क्या? घटना तो हो चुकी जांच भी हो जाएगी। आईजी और एसपी की भी कहीं जिम्मेदारी मुकर्रर होगी क्या? घटना क्यों हुई? उच्च स्तर के अधिकारी जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराए जाते हैं। मुख्यमंत्री जी कुछ ऐसा न्यायपूर्ण सबक सिखाओ की उच्च पदों पर बैठे अधिकारी आइंदा ऐसी गेर जिम्मेदाराना रवैया नहीं अपनाए। नहीं तो चुनावी वर्ष में टिकरा कांग्रेस के सिर पर फूटना है। चुनावी मुद्दा तो केंद्रीय मंत्री के बयान से बन ही गया है।

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