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यूसीईटी में पाॅच दिवसीय फ.डी.पी का समापन

बीकानेर।शनिवार को यूसीईटी संघटक काॅलेज, बी.टी.यू. में चल रहे टेक्युप-3 स्पोन्सड फ.डी.पी. ‘‘इन्टरडिसीरलीनेरी एप्रोच टू ससटेनेबीलीटी यूजिंग ग्रीन टेक्नोलाॅजी’’ का समापन हुआ। कार्यक्रम की कन्वीनर डाॅ. अनु शर्मा ने बताया कि समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. आर.ए.गुप्ता कुलपती, आर.टी.यू कोटा थे। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी ने दुनिया भर में विकट चुनौतिया पैदा की हैं। यह ये सीख देते है कि मनुष्य को तकनीकी विकास की प्रक्रियाओं के लिए जैविक तन्त्रों के विकास पर बल देना चाहिये। प्रो. एच.डी. चारण, कुलपति बी.टी.यू ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की । उन्होंने कहा कि वर्तमान गति से यदि परम्परागत उर्जा स्त्रोतो का उपयोग किया जाता रहा तो आने वाले समय में ग्लोबल वार्मिग बढकर दोगुनी हो जाएगी अतः हरित उर्जा के विकल्पों को कारगार करने की आवश्यकता ही, हमें अपनी आदते कार्यशैली आदि को बदलने का कठोर निर्णय लेना है। कृतिम तरीको तकनीको का उपयोग करने ऐसे उत्पाद बनाने चाहिये जिससे प्रकृति को हानि ना हो। डाॅ. वाई.एन. सिंह, प्राचार्य ने बताया कि विश्लेषात्मक प्रक्रिया को और उन्नत बनाना चाहिये जिससे हानिकारक वस्तु को बनने से पहले ही रोका जा सके। ग्रीन टेक्नोलाॅजी का उपयोग करके केवल सोलर एनर्जी वर्षा जल जैसे प्राकृतिक संसाधनो का ही नहीं उपयोग संभव है बल्कि कृतिम प्रकास, वायु, जल, विकीरण प्रदूषण मे कमी लाकर पर्यावरण को सुरक्षित किया जा सकता है।

डाॅ. अनु शर्मा ने बताया कि इन पाॅच दिवसीय फ.डी.पी. मे हरत रसायन , पेपर सेन्सर, रि यूज्य डेरावइट, फयूज ग्रीन, दवाईया, ग्रीन वेस्ट वाटर और सोलिड वेस्ट तकनीको पर चर्चा हुई। इसके साथ-साथ हमारे देश के प्राकृतिक संसाधनों से कितनी उर्जा प्राप्त की जा सकती है इस पर गहन मंथन हुआ। डाॅ. एस.के. महला ने बताया कि भविष्य में इन हरित तकनीकी की क्या उपयोगिता है इनके द्वारा औद्योगिक अपशिष्टो जैसे धान की भूसी, उडन राख, ब्लास्ट फरनेस स्लेग से सीमेन्टीय उत्पादों को कैसे बनाया जाता है और पर्यावरण प्रदूषण को कैसे रोका जा सकता है यह क्षेत्र बेहतर भविष्य का वादा करता है पर्यावारण के अनुसार प्रौद्योगिकी के साथ विष को नष्ट करने की नई तकनीकी के विकास पर नई दिशा दिखाता। डाॅ. धर्मेन्द्र तिवारी ने बताया कि टेक्युब-3 के तहत हरित प्रौद्योगिकी पर ध्यान केन्द्रित करने के साथ उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में कार्य किया जा रहा हैै इस प्रोजेक्ट के तहत शिक्षण सीखने और ग्रीन अनुसंधान की क्षमता में सुधार हुआ है। अंत में डाॅ. गायत्री शर्मा सह संयोजक ने सभी आगन्तुओं को धन्यवाद ज्ञापित किया तथा बताया है भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों से नई तकनीको के प्रति जागरूकता बढेगी। श्रीमती नीलम स्वामी, डाॅ. हेम आहुजा, डाॅ. प्रीति पारिक, डाॅ. सुधीर भारद्वाज, श्रीमती अनिता पंवार ,सुरेन्द्र जांगु ने फ.डी.पी. के दौरान तकनीकी सत्र संभाला।

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