राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिससे राज्य में बैंकों और वित्तीय संस्थानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मामला उन शुल्कों (चार्जेज) से जुड़ा था जो बकाया ऋण की वसूली के दौरान संपत्ति का कब्जा लेने के लिए पुलिस सहायता प्राप्त करने पर वसूले जा रहे थे। कई मामलों में ये शुल्क बहुत अधिक थे। उदाहरण के तौर पर, एक मामले में लगभग ₹5.51 लाख के बकाया ऋण पर पुलिस सहायता के लिए ₹1.29 लाख की मांग की गई थी।
इस मुद्दे पर AU स्मॉल फाइनेंस बैंक समेत कई बैंकों ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रशासनिक आदेश या सरकारी सर्कुलर कानून में निर्धारित नियमों से ऊपर नहीं हो सकते। जब तक संबंधित नियमों में कानूनी प्रक्रिया के तहत बदलाव नहीं किया जाता, तब तक पुलिस विभाग राजस्थान पुलिस नियम, 2008 के नियम 10 में तय दरों से अधिक शुल्क नहीं ले सकता।
अदालत ने उन सभी अतिरिक्त शुल्क मांगों को निरस्त कर दिया है जो निर्धारित कानूनी दरों से अधिक थीं और संबंधित अधिकारियों को नियमों के अनुसार नए बिल जारी करने के निर्देश दिए हैं।
यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह फैसला सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं है। इससे पूरे राजस्थान में बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए ऋण वसूली प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और किफायती बनने की उम्मीद है। अब गिरवी रखी गई संपत्तियों का कब्जा लेने की प्रक्रिया में आने वाला खर्च काफी हद तक कम हो सकेगा।
AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की भूमिका
इस मामले में AU स्मॉल फाइनेंस बैंक प्रमुख याचिकाकर्ता (लीड पेटिशनर) था। अदालत का यह निर्णय न केवल बैंक के लिए बल्कि राजस्थान में काम कर रहे पूरे बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
यह फैसला इस बात का भी उदाहरण है कि कानूनी विभाग केवल संस्थानों के हितों की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि ऐसी व्यवस्थागत समस्याओं की पहचान कर उनका समाधान भी खोज सकते हैं, जिससे पूरे उद्योग और व्यापक वित्तीय तंत्र को फायदा पहुंचे।
AU स्मॉल फाइनेंस बैंक इस महत्वपूर्ण उपलब्धि में योगदान देने वाली पूरी टीम और सभी सहयोगियों पर गर्व महसूस करता है।
