– राजेन्द्र गुंजल

राजस्थान में कुम्भ के बाद अब शादियां असर दिखाने लगी हैं । इनका असर शहरों के साथ साथ गांवों में भी है । पहली लहर में गांव बचे हुए थे । उस दौरान गांवों में कोरोना की दहशत ज्यादा , असर कम था । दूसरी लहर के दौरान गांवों में दहशत कम , असर ज्यादा है ।
राजस्थान में शादियां धूमधाम से होती हैं । हालांकि शादियों की अच्छी खासी शुरुआत हो चुकी है । अभी रफ्तार में तेजी आना बाकी है । कुछ अबूझ सावे होते हैं । मसलन अक्षय तृतीया और पीपल पूनम मई माह में है । जबकि भड़ल्या नवमी और देवशयनी एकादशी जुलाई में है । इस तरह 20 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ ही शादियां थम पाएगी । तब तक कोरोना पर लगाम लगाना सरकार के लिए एक चुनौती होगी ।
शादियों पर सरकार की सख्ती का असर सम्भागीय मुख्यालयों व कुछ बड़े शहरों तक ही सीमित नजर आता है । दूरदराज के जिला मुख्यालयों पर भी सख्ती का असर नजर नहीं आता । कस्बों में प्रशासन और पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर कोरोना प्रोटोकॉल तोड़ना आम बात है ।
गांव वाले शादियों के सामान की खरीद फरोख्त छोटे शहरों और कस्बों से ही करते है । शादियों में कपड़ों और ज्वैलरी की खरीद सबसे महत्वपूर्ण होती है । जब भी गांव वाले खरीदारी करने आते हैं तो एक समूह बनाकर आते है । खरीदारी करने वाले 3-4 लोग होते हैं । पर उनके साथ बीसियों लोग ट्रैक्टर ट्रॉली में बैठ कर शहर कस्बे में पहुंचते हैं । ऐसी स्थिति में ना तो मास्क होता है और न ही सोशल डिस्टेंसिंग । यह स्थिति संक्रमण तेजी से फैला रहीहै ।
इन शहर कस्बों के व्यापारी भी पुलिस – प्रशासन की आंखों में धूल झोंक रहे हैं । कपड़ा और ज्वैलरी सभी व्यवसायियों ने दूकानों से अपना सामान उठाकर अपने घरों में शिफ्ट कर दिया है । खरीदारी करने वाले पहले इन्हें फोन करके आते हैं । ऐसे में वे सीधे ही दूकान की बजाय व्यापारी के घर पहुंच रहे हैं । एक छोटे से कमरे में 15 – 20 लोगों की उपस्थिति सोशल डिस्टेंसिंग के बिना होती है और वह भी बिना मास्क के । ऐसे में कोरोना का फैलाव निश्चित है ।
इन छोटे शहरों और गांवों में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है । विवाह कार्यक्रम किसी समारोह स्थल की बजाय खेतों में किया जा रहा है । जेसीबी से खेतों को समतल करा लिया जाता है । वहीं पर शामियाना और कनातें लगाकर हजारों को भोजन कराया जा रहा है । यहां भी कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाई जा रही है । गांव – कस्बों में कुछ दबाव समूह भी होते हैं । इनके खिलाफ कोई कार्यवाही करने में पुलिस – प्रशासन भी आंखें मूंद लेता है ।
अगर सरकार सख्त नहीं हुई तो 20 जुलाई ( देवशयनी एकादशी ) तक प्रदेश में हालात बेकाबू हो सकते हैं ।