नई दिल्ली,(दिनेश शर्मा “दिनेश शर्मा अधिकारी”) राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने आदेश की पालना में कार्यकारी अध्यक्ष ने मुख्य सचिव को सभी जिला एवं तालुका विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ मिलकर विशेष अभियान चलाने के सोमवार 21 दिसम्बर 21 सोमवार को निर्देश जारी कर दिए है। रालसा उप सचिव प्रथम ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के द्वारा रिट याचिका संख्या 196/2001 उनवान पी.यू.सी.एल. बनाम भारत संघ व अन्य प्रकरण में राज्य सरकारों को आदेशित कर कहा कि मुख्य सचिव को आश्रय विहीन गरीब व असहाय व्यक्तियों के स्थाई एवं अस्थाई निवास के लिए कार्य योजना बनाने का आदेष देते हुए समुचित व्यवस्था करे। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की पालना में 21 दिसम्बर 21 सोमवार को राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष, न्यायधीश दिनेश गुप्ता के निर्देषानुसार मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार को पत्र जारी कर निर्देषित किया गया है कि वे अपने अधीनस्थ समस्त जिला कलक्टर, स्थानीय स्वायत शासन विभाग, मुख्य कार्यकारी अधिकारी-नगर निगम, आयुक्त-नगर पालिका/नगर परिषद, पुलिस अधीक्षक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देष दें कि वे अपने क्षेत्र के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष (जिला एवं सेषन न्यायाधीष) के निर्देषन में एक कार्य योजना तैयार कर विषेष अभियान चलाते हुए जिला, उपखण्ड एवं तालुका स्तर पर 22 से 24.दिसम्बर 21 के मध्य सायं 06.00 से 10.00 बजे तक सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अध्यक्ष, तालुका विधिक सेवा समिति की मुख्य भूमिका में आवष्यक पर्याप्त संख्या में कार्मिकों (स्टाफ/पुलिस अधिकारी/बीट पुलिसकर्मी/पी.एल.वी. या समाज सेवी एन.जी.ओ. का दल बनाकर खुले में रहने को मजबूर गरीब व असहाय व्यक्तियों की पहचान करें और उन्हें तत्काल निकटतम रेन बसेरों में कोविड प्रोटोकाॅल के नियमों की पालना करते हुुए रिहायष करने के लिए प्रेरित करें और वहां तक पहुंचाना सुनिष्चित करें। उप सचिव प्रथम ने बताया कि रेन बसेरे/आश्रय स्थल में रह रहे व्यक्ति/पीड़ित को उनके विधिक अधिकारों से अवगत कराते हुए उनको आवष्यकतानुसार निःषुल्क विधिक सहायता देने, रेन बसेरे/आश्रय स्थल में आवष्यक सुविधा, निःषुल्क या रियायती दरों पर भोजन की व्यवस्था करवाने, खुले में रहने से ठण्ड के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसके लिए संबंधित निकाय/नगर पालिका अधिकारी या अन्य संबंधित प्राधिकृत राजकीय अधिकारी को उत्तरदायी ठहराने, महिलाओं और पुरूषों के लिए अलग-अलग रेन बसेरे/आश्रय स्थल खोले जाने के संबंध में व्यापक निर्देष भी जारी कर दिये है। इस महत्वपूर्ण विषय पर उच्चतम न्यायालय के निर्देषों के अनुसरण में राज्य सरकार के द्वारा स्थायी/अस्थायी रेन बसेरे/आश्रय स्थल स्थापित किये गये है और इस बात की जानकारी आमजन को होना आवष्यक है, ताकि वे इससे लाभान्वित हो सकें।