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राष्ट्रीय ग्रामीण पत्रकार संघ के प्रदेश महामंत्री राम किशोर अवस्थी ने जिला अधिकारी सुहास एल वाई को प्रतीक चिन्ह भेट की

नोएडा, ( ओम एक्सप्रेस )
राष्ट्रीय ग्रामीण पत्रकार संघ के प्रदेश महामंत्री राम किशोर अवस्थी ने जिला अधिकारी गौतम बुद्ध नगर के पैरालम्पिक 2021 रजत पदक विजेता सुहास एल वाई को राष्ट्रीय ग्रामीण पत्रकार टीम के साथ जा कर प्रतीक चिन्ह भेट की । टीम मे, महेंद्र चितहऱा, डॉक्टर विनोद, रीता देवल जिला महासचिव गाजियाबाद, रामवीर, वीर पाल चौधरी, धर्म जीत दुरियाई प्रधान,अजय डबास ,जग मोहन, नवीन , अक्षय डबास,विकास डबास आदि लोगो ने जिला अधिकारी के सम्मान प्रतीक भेट के समय उपस्थित थे। सुहास एल वाई के बारे बताते है कि कर्नाटक के छोटे से शहर शिगोमा में जन्मे सुहास एलवाई ने अपनी तकदीर को अपने हाथों से लिखा है। जन्म से ही पैर से विकलांग सुहास शुरुआत से IAS नहीं बनना चाहते थे। बचपन से ही को खेल को लेकर बहद दिलचस्पी रखने थे। उन्हें पिता और परिवार का भरपूर साथ मिला। पैर पूरी तरह फिट नहीं था तो समाज के ताने उन्हें सुनने को मिलते रहे, लेकिन पिता और परिवार चट्टान की तरह उन तानों के सामने खड़े रहे और कभी भी सुहास का हौंसला नहीं टूटने दिया। सुहास के पिता उन्हें सामान्य बच्चों की तरह देखते थे। सुहास का क्रिकेट प्रेम उनके पिता की देन है। परिवार ने उन्हें कभी नहीं रोका, जो मर्जी हुई सुहास ने उस गेम को खेला और पिता ने भी उनसे हमेशा जीत की उम्मीद की। पिता की नौकरी ट्रांसफर वाली थी, जो सुहास की पढ़ाई शहर-शहर घूमकर होती रही। शुरुआती पढ़ाई गांव में हुई तो वहीं सुरतकर शहर ने उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से कम्प्यूटर साइंस में इंजिनियरिंग पूरी की।कंप्यूटर इंजिनियरिंग के बाद सब की तरह सुहास ने भी बैंगलोर की इस कंपनी में नौकरी कर ली, लेकिन उनकी भीतर एक कमी खल रही थी। सुहास ने कहा कि अंदर से एक आवाज आ रही थी कि कहीं कुछ कमी है। उन्हें लग रहा था कि उनकी जीवन पूर्ण नहीं है। बार-बार ये कसक मन में उठ रहा था कि अगर इस जीवन में समाज के लिए कुछ नहीं किया तो क्या किया। ये कमी खत्म हुई जब उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। साल 2005 में पिता की मृत्यु के बाद सुहास टूट गए थे। सुहास ने बताया कि उनके जीवन में पिता का महत्वपूर्ण स्थान था। पिता की कमी खलती रही, उनका जाना सुहास के लिए बड़ा झटका था। इसी कमोकश के बीच सुहास ने ठान लिया कि अब सिविल सर्विस ज्वाइंन करनी है। फिर क्या था सब छोड़छाड़ कर उन्होंने UPSC की तैयारी की। उनकी मेहनत और तकदीर ने उनका साथ दिया। वनइंडिया के साथ बातचीत के दौरान सुहास ने इस बात का जिक्र भी किया कि हमें अपना कर्म करना चाहिए बाकी मुक्कदर पर छोड़ देना चाहिए। अगर आप किसी चीज को दिल से चाहेंगे और उसके लिए कोशिश करेंगे तो फिर पूरी कायनात उसे आपसे मिलाने की कोशिश करेगी। ऐसा ही हुआ, पहले पीटी, फिर मेन्स और फिर इंटरव्यू में सफलता हासिल कर सुहास साल 2007 में यूपी कैडर से IAS अधिकारी बन गए।और 2020 मे जब गौतमबुद्ध नगर का चार्ज संभाला था तब कोरोना महामारी की सख्या बढ़ती जा रही थी और पूर्व जिला अधिकारी ने अपने हाथ खड़े कर दिये थे तब योगी जी ने सुहास जी को भेजा कि गौतम बुद्ध नगर मे कोरोना महामारी को कंट्रोल करो और उन्होंने जैसे ही गौतम बुध नगर मे कदम बढ़ाये और आज तक गौतम बुद्ध नगर मे कोरोना महामारी को बढ़ने नही दिया ।आज यह स्थिति है कि 10 – 11 कोरोना मरीज है।

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