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राहुल गांधी इकलौते नेता जो निडरता से मोदी- शाह का डटकर मुकाबला कर सकते हैं: CM अशोक गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बावजूद मोर्चा संभालना पड़ेगा क्योंकि वह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एकमात्र विकल्प हैं। ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के इकलौते नेता हैं जो ‘साहसपूर्वक और निडरता’ के साथ मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह का मुकाबला कर सकते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने गांधी परिवार को 134 साल पुरानी पार्टी के लिए ‘सेतु’ बताया और इस आरोप को खारिज कर दिया कि वह वंशवाद की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बावजूद राहुल गांधी को मोर्चा संभालना पड़ेगा।

लोकसभा में खराब प्रदर्शन के कारण इस्तीफा दे दिया था: वायनाड से सांसद राहुल गांधी की तारीफ करते हुए गहलोत ने कहा कि गांधी ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान किसानों, युवाओं, बेरोजगारी और महंगाई से संबंधित अहम मुद्दे उठाए थे। गौरतलब है कि गांधी ने अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

गुजरात चुनावों के लिए कड़ी मेहनत की थी: एक साल पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले गहलोत ने कहा कि यह कहना गलत होगा कि मोदी के नेतृत्व का कोई विकल्प नहीं है। राहुल गांधी विकल्प हैं। यह सच है कि लोग उनसे जुड़ नहीं पाए क्योंकि मोदी की शैली और रवैया अलग है। उन्होंने कहा कि गांधी ने 2017 के गुजरात चुनावों के लिए इतनी कड़ी मेहनत की थी कि लोगों को लगा कि भाजपा हार जाएगी।

मणिशंकर अय्यर ने मोदी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी: सीएम गहलोत ने कहा कि पीएम मोदी गुजरात में भावनात्मक प्रचार अभियान चलाया, मणिशंकर अय्यर की टिप्पणियों का गलत अर्थ निकाला गया। वह चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। दरअसल, मणिशंकर अय्यर ने मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी जिसके बाद उन्हें कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था।

राहुल गांधी ही मोदी-शाह को टक्कर दे सकते है: राजस्थान के मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों और उससे पहले गुजरात चुनावों के लिए व्यापक प्रचार किया। उन्होंने कहा केवल राहुल गांधी ही हैं जो अमित शाह और नरेंद्र मोदी को टक्कर दे सकते हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान गांधी द्वारा उठाए गए अहम मुद्दे र्सिजकल स्ट्राइक और राष्ट्रवाद के आसपास घूमती बहस के आगे फीके हो गए।

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