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लॉकडाउन में देवदूत बने एसडीओ, डिलीवरी पीरियड में महिला को अपनी वाहन से पहुंचाया अस्पताल

-अस्पताल प्रशासन प्रसव पीड़िता को नही दिया एम्बुलेंस,दर्द से कराहती रही पीड़िता।

-अस्पताल की बदहाल तस्वीर सुधरने का नाम नहीं ले रहा हैं

बिहार(सुपौल)प्रशांत कुमार(ओम एक्सप्रेस ब्यूरों )-जहर खाओ न माहुर खाओ,मरना हैं तो अनुमंडलीय अस्पताल त्रिवेणीगंज जाओ …जी हां अगर वहां के घूमते आवारा कुत्तो को मलेरिया हो सकता हैं तो फिर आम आदमी क्या हैं? अस्पताल में लोगों को नई जिंदगी मिलती है, बीमारियां दूर होती है, उन्हीं अस्पताल प्रबंधनों की लापरवाही के कारण लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।खासकर जिले के त्रिवेणीगंज में स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत किस कदर खराब है,इसकी एक बानगी गुरुवार को देखने को देखने को मिली।जहां विनीता नामक प्रसव पीड़िता को वाहन के लिए जूझने की परिस्थिति वास्तव में दुखदायी थी। प्रखण्ड कार्यालय के समीप एनएच के किनारे प्रखण्ड किनारे दर्द से बिलख रही थी,रो रही थी।सूचना पर लॉकडाउन में देवदूत बने त्रिवेणीगंज के जाबांज एसडीओ विनय कुमार सिंह ने अपनी जिम्मेदारी और मानवता का परिचय दिया।डिलीवरी पीरियड में महिला को अपने सरकारी वाहन से अस्पताल पहुंचाया बल्कि पूरा ख्याल भी रखा।

एसडीओ की इस मानवतावादी चेहरे का चर्चा चहुंओर हो रही है।लेकिन अस्पताल प्रबंधन के लिए यह बहुत ही शर्मिंदगी भरी तस्वीर है। इस पूरे मामले की हम आपको स्क्रीन पर एक्सक्लूसिव तस्वीरें दिखा रहे हैं। इसको देखने के बाद भी अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी का दिल नहीं पसीजा है।दरअसल प्रखंड क्षेत्र के पिलुवाहा वार्ड नंबर 4 निवासी सचेन्द्र सादा की 26 वर्षीय पत्नी विनीता देवी प्रसव पीड़ा होने के बाद बुधवार की अहले सुबह परिजनों ने अनुमंडलीय में भर्ती कराया। लेकिन गुरुबार की शाम करीब पांच बजे अस्पताल कर्मियों ने परिजनों को दो, तीन दिन में प्रसव होने की बात बताकर पैदल ही घर जाने को दे दिया।जब परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से एम्बुलेंस की मांग की तो, अस्पताल प्रशासन द्वारा एम्बुलेंस नहीं दिया गया। मजबूर परिजनों ने अस्पताल से प्रसव पीड़िता को लेकर पैदल ही घर की ओर निकल पड़े, लेकिन जैसे ही करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय कर ब्लॉक के पास पहुचीं तो प्रसव पीड़िता को प्रसव पीड़ा होने लगा, दर्द इतना हो रहा था की पीड़िता दर्द से सड़क किनारे बिलख रहीं थी, पीड़िता की दर्द को देख साथ मे आए महिला परिजनों की आंखे भी आँसू से डबडबा रहीं थी, इसकी सूचना जैसे ही जांबाज अनुमंडल पदाधिकारी विनय कुमार सिंह को मिली उन्होंने आनन-फानन में अपनी वाहन से अनुमंडलीय अस्पताल पहुँचाया।

एसडीएम के वाहन पर प्रसव पीड़िता को देख अस्पताल प्रशासन के कान खड़े हो गए। हालांकि अनुमंडलीय अस्पताल के लिए ये कोई नई कारनामें नहीं हैं। उदासीन प्रबंधन व्यवस्था के कारण समय – समय पर इस प्रकार की समस्या उत्पन्न होती रहती हैं।बहरहाल कोरोना महामारी के बीच जिस तरह से गर्भवती महिलाओं की समस्या बढ़ गई है।अस्पतालों में कोरोना के बहाने किसी दूसरी बीमारी का इलाज सही ढंग से नहीं हो रहा है। अगर समय रहते प्रशासनिक महकमें इस पर ध्यान नहीं देती है तो गर्भवती महिलाओं को आने वाले समय में काफी परेशानी उठानी पड़ सकती है। हालांकि ईस मामले में अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ आरपी सिंहा ने यह कहकर मामले से पल्ला झाड़ लिया कि परिजनों अपने मन से पीड़िता को यहां से लेकर चल गए।

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