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लोक संस्कृति के मौन साधक थे पं. शिवशंकर भादाणी

बीकानेर,।राजस्थानी मान्यता आंदोलन के समर्थक एवं भाषा साहित्य, संस्कृति को समर्पित मौन साधक कीर्तिशेष पं. शिवशंकर भादाणी द्वारा दी गई सांस्कृतिक एवं सामाजिक सेवाओ को नगर कभी नहीं भूल सकता। यही केन्द्रीय भाव रहा। आज प्रातः सृजन सदन नालन्दा परिसर में आयोजित कीर्तिशेष पं. शिवशंकर भादाणी कि तीसरी पुण्यतिथि पर आयेाजित ‘स्मृति-नमन’ कार्यक्रम के तहत उन्हें शब्दांजलि अर्पित की गई।
प्रारंभ में राजस्थान के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे लोक परंपरा के साधक तो थे ही साथ ही बहुआयामी व्यक्तित्व थे। उन्हें नमन करते हुए वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब ने कहा कि उनकी कार्यशैली और जीवन कि सादगी के साथ-साथ साहित्यिक आयोजनों में उनकी भूमिका हमेशा याद रहेगी।
वरिष्ठ एड. सुरेन्द्र शर्मा ने उन्हें बहुमुखी प्रतिभा का धनी बताया तो एड. महावीर सांखला एड राजेश गुप्ता एवं एड. आनन्द गौड़ ने उन्हें नमन करते हुए राजस्थानी मान्यता आंदेालन का प्रबल समर्थक बताया।
संस्कृतिकर्मी संजय सांखला ने नमन करते हुए शिवशंकर भादाणी लोकसंस्कृति के अच्छे जानकार थे, और उन्होने जीवनपर्यन्त लोक संस्कृति के प्रति समर्पण भाव रखा। युवा कवि गिरिराज पारीक ने शब्दांजलि देते हुए शिवशंकर भादाणी साहित्य संस्कृति के क्षेत्र में तो सहभागी रहते थे साथ ही समाज सेवा के क्षेत्र में उनकी सेवाएं उल्लेखनीय रही है।
युवा शिक्षाविद् राजेश रंगा ने उन्हें नमन करते हुए कहा कि वे नेक इंसान थे नई पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व से प्रेरणा लेनी चाहिए। अपनी शब्दांजलि अर्पित करते हुए युवा शायर माजिद खां गौरी ने उन्हें अपनी श्रद्धा अर्पित करते हुए बताया कि वे ज्योतिष का भी गहरा ज्ञान रखते थे। उन्हें नमन करते हुए समाजसेवी भैरूरतन रंगा ‘शन्नू’ ने कहा कि वे हमारी परंपराओं के प्रति सजग रहकर पैरोकारी करते थे।
पं शिवशंकर भादाणी को अपनी शब्ंदाजलि देते हुए अशोक शर्मा, भवानी सिंह, कार्तिक मोदी, तोलाराम सारण, घनश्याम ओझा, आशिष रंगा, कन्हैयालाल, सुनील व्यास, महावीर स्वामी सहित अनेक गणमान्य लोगों ने उन्हें नेक इंसान बताते हुए प्रेरणादायी पुरूष बताया।
स्मृति नमन कार्यक्रम का संचालन हरिनारायण आचार्य ने किया।

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