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लो आसमाँ में छेद हो गया——-!

कवि दुष्यन्त के शब्दों में— कौन कहता हैं कि आसमाँ में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से मारो यारों। जी- हाँ ! आसमाँ में छेद हो गया । एक साधारण सा कार्यकर्ता राज्य का सीएम बन गया। मोदी और शाह ने देश की राजनीति के सारे सिस्टम को ही बदल डाला और सारे नेताओ के घर लगा दिया ताला। तीन राज्यो छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान को ऐसे नये मुख्यमन्त्री दिये जिन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वह एक दिन सीएम बनेंगे। तीन राज्यो में तीन सरप्राइज। हमारे प्रदेश राजस्थान में धरा पर राजे आई और कुर्सी पर बैठे भजन। राजस्थान में गहलोत— राजे का 25 साल का युग बीत गया और नया दौर आरंभ हो गया। गीता में कृष्ण का उदघोष सही हैं जिसमे कृष्ण ने कहा था कि सद्पुरुषों का उद्धार और आसुरी शक्तियों का विनाश करने के लिए , धर्म को प्रतिष्ठित बनाये रखने के लिए मैं समय समय पर प्रकट होता रहता हूँ। इस चुनाव में यह संकेत समाहित हैं कि भाजपा- साधारण कार्यकर्ता- पिछड़े वर्ग को भी उच्च पद पर आसीन कर सकती हैं। जब व्यक्ति परिवार से बड़ा होने लगे या फिर नेता भस्मासुर बनने लगे । जन समस्याओं से दर- किनारा करने लगे- भृष्टाचार में डूबने लगे- युवाओ का भविष्य नक़ल और पेपर आउट से बिगड़ने लगे, सादगी और विनम्रता पर हमला होने लगे- महिलाओं की आबरू लूटने लगे- सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति पर आक्रमण होने लगे- तब लोगो की आह आसमाँ को भी चीड़ देती है। यह तो आसमाँ में छेद हुआ हैं। धन्य हो मोदी- शाह की जोड़ी- जिन्होंने राजस्थान में वसुंधरा, मध्यप्रदेश में शिवराज, और छत्तीसगढ़ में रमनसिंह का दौर ख़त्म कर दिया और यह साफ़ कर दिया कि वरिष्ठ एवम् अनुभवी नेता होना पद पाने की योग्यता नहीं हैं। पद पाने के लिए बेदाग़ निष्ठा होनी चाहिए। जनसेवा और देश सेवा कूट- कूट कर भरी होनी चाहिए। अब गहलोत व वसुन्धरा दोनों जाँच के दायरे में हैं। लगता हैं अब दोनों की फ़ाइले खुलेगी क्योंकि लम्बे समय से दोनों नेता एक दूसरे का बचाव करते आ रहे हैं। भजनलाल के शपथ समारोह में गहलोत- राजे को हाथ मिलाते हुए, खिलखिलाते हुए लोगो ने देखा। सब समझ में आ गया। अब राजस्थान में नई हवा चली हैं। अब प्रदेश ग़ैर गहलोत व ग़ैर वसुन्धरा युग में प्रवेश कर चुका हैं। इधर अब भंजनलाल शर्मा के सामने भी कई चुनौतियाँ हैं। 5-50 लाख करोड़ रुपये के कर्ज से दबे , आर्थिक रूप से चरमरा रहे राज्य को नम्बर वन का राज्य बनाना हैं। आश्चर्य तो होगा ही लेकिन मोदी जी का जिसके सिर पर हाथ हैं वो भला नये युग का सूत्रपात क्यों नहीं कर पायेगा?। —— मनोहर चावला

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