नई दिल्ली,(दिनेश शर्मा अधिकारी”)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस तथ्य पर खेद व्यक्त किया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लंबे समय से जेल में बंद व्यक्तियों को उनके वकीलों के तैयार न होने के कारण जमानत देने से इनकार कर दिया।
जस्टिस संजय किशन कौल और एमएम सुंदरेश की बेंच ने कहा,”एक स्पष्ट गलत धारणा है कि परिस्थितियों पर जमानत याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता है और यह सच है कि वकील तैयार नहीं होने से बच नहीं सकते हैं। लेकिन इसके लिए चेतावनी तब होगी जब आरोपी को 14 साल से अधिक की जेल हो चुकी है और अन्य शर्तों को देखा जाना चाहिए। इस प्रकार वकील की गलती के लिए किसी व्यक्ति को जमानत देने से इनकार करना वास्तव में न्याय का मजाक होगा।” जस्टिस संजय किशन कौल और एमएम सुंदरेश की बेंच ने इस संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण को अस्वीकार कर दिया। अदालत उन परिस्थितियों से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें अदालतों को उन दोषियों को जमानत देने पर विचार करना चाहिए जो काफी समय से हिरासत में हैं और जिनकी आपराधिक अपील उच्च न्यायालयों में लंबित है। मामला विशेष रूप से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित ऐसी आपराधिक अपीलों से संबंधित है। शीर्ष अदालत ने पहले इन जमानत मामलों को उच्च न्यायालय के समक्ष रखने का निर्देश दिया था; रजिस्ट्री को उन्हें स्वप्रेरणा से मामलों के रूप में पंजीकृत करना आवश्यक था। कोर्ट ने पाया कि हालांकि स्वत: संज्ञान से मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन उन्हें सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना बाकी है। मामले की अगली सुनवाई 31 मार्च को होगी।