

– कश्मीर के स्कूलों में शिक्षकों को नाम और धर्म पूछ कर गोली मारने की पार्श्वभूमी पर


करण समर्थ : आयएनएन भारत मुंबई
अब हमें विक्रेता का नाम धर्म पूछ कर ही अपनी खरीदारी करने की स्थिति बन गयी है । यदि हम अपने धर्म तथा अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए बहुत कुछ कर नहीं सकते है, तो क्या कम से कम इस संदेश को हम अपने सभी ग्रुपों में सबको भेजकर हमारे सोये हुए हिन्दु भाइयों को जगा तो सकते है, ऐसा सवाल भाजपा धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रकोष्ठ मुंबई तथा उत्तर पश्चिम जिला संयोजक जितेन्द्र सालुंके ने वार्तालाप में किया।
सालुंके आगे कहां, क्या आपको याद है, मात्र दो हफ्तों पहले ही कश्मीर में दिनदहाड़े नाम और धर्म पूछ कर स्कूल के हिन्दू शिक्षकों को गोली मारी थी। क्या इस आधार पर अब हम आप हिन्दू अपने दिवाली और बाद बाकि सभी त्यौहारों या रोजमर्रा की खरीदारी भी नाम पूछ कर धर्म देख कर करने जैसी गंभीर स्थिति बना दि गई है, इससे अनभिज्ञ तो नहीं हैं ना, ऐसा भाजपा धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रकोष्ठ मुंबई तथा उत्तर पश्चिम जिला संयोजक जितेन्द्र सालुंके ने पूछा।


वह आगे कहते हैं, यदि हम ऐसा नहीं करते तो हम उन बेकसूर मृत आत्मा के साथ धोका करने जैसा होगा। हम जब ऐसे किसी विधर्मीयों से कोई भी सामग्री खरीदते है, तो इसका मतलब हम जाने अनजाने अपने दुश्मनों को ही हमारी भूमी से गद्दारी करने वाले का हाथों को मजबूत कर रहे है, जिसे अब हमें रोकना होगा । यह वही विधर्मी है, जो आज सरकार से केवल पंद्रह मिनट के लिए मिल्ट्री हटा लें और हम सौ करोड़ हिन्दुओं को काट डालेंगे ऐसी खुलेआम धमकीयां देते हैं। तो कहीं हमारी इन्सानियत के नाते वालीं भुमिका कल हमारे आने वाली पीढ़ीयों को मिटाने का कारण बनेगा, क्या हमें ऐसा करने का अधिकार है ? फिर भी जिन हिन्दूओं को हिन्दू मुस्लिम भाई भाई का कीड़ा लगा हो वह किसी मस्जिद में एक दिया जला कर, आरती करके दिखा देना या छठ पूजा का प्रसाद खिला कर दिखाएं, तब हम फिर से इसपर सोचेंगे, ऐसी संतप्त प्रतिक्रिया जितेन्द्र सालुंके ने व्यक्त किए हैं ।
