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विरासत की अगन से रची सवाई हुवै कविता के सृजक कमल रंगा का चौथा शाहकार लोकार्पित

कवि-कथाकार कमल रंगा की चौथी पोथी सवाई हुवै कविता की शुरुआती रचना अगन से दीप्त है । अगन अनेकार्थी एवं बहुरूपी शब्द और भारतीय संस्कृति का प्राण रूप है । अगन को हम पौराणिक संदर्भों में तो समझते ही हैं, वैश्विक रूप में भी प्रमुख पाते हैं। इसी वैश्विक विरासत की अगन से रची सवाई हुवै कविता के सृजक कमल रंगा की चौथी कृति के लोकार्पण समारोह का साक्षी होने का अवसर राजस्थानी युवा लेखक संघ, प्रज्ञालय एवं सुषमा प्रकाशन ने उपलब्ध करवाया….

काव्य सृजन में संयम और निर्मम होना जरूरी है – डॉ. चारण
रंगा के काव्य सृजन में पूर्ण परिपक्वता के भाव देखने को मिलते है

बीकानेर । कविता सदैव
मानव समाज की चेतना को बढ़ाने का
कार्य करती है। ऐसे में कविता की सृजन
प्रक्रिया में कवि को संयम रखते हुए
निर्मम होना होता है। इस तरह अपने
शब्दों में संयमता रखते हुए समाज में
व्याप्त कुरीतियों पर निर्ममता से प्रहार करने
वाला ही सच्चे अर्थों में कवि-साहित्यकार
होता है और ये दोनों ही गुण कमल रंगा
की कविताओं में देखने को मिलते हैं। ये
उद्गार नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के
अध्यक्ष एवं ख्यातनाम नाटककार डॉ.
अर्जुनदेव चारण ने रविवार की देर शाम
नागरी भंडार स्थित नरेन्द्र सिंह
ऑडिटोरियम में प्रज्ञालय संस्थान एवं
सुषमा प्रकाशन द्वारा आयोजित कमल रंगा
के चौथे राजस्थानी काव्य संग्रह ‘सवाई
हुवै कविता’ के लोकार्पण समारोह के
अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त
किए।

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