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विवेकानन्द संदेश यात्रा के बीकानेर आगमन की पूर्व संध्या पर कवियों ने सुनाई देशभक्ति रचनाएं

      बीकानेर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद बीकानेर इकाई के तत्वावधान में होटल राजमहल में एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। साहित्य परिषद् के संस्थापक सदस्य रमेश कुमार शर्मा, प्रांत अध्यक्ष डॉ.अखिलानंद पाठक एवं इकाई अध्यक्ष विनोद ओझा ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कवयित्री डॉ.कृष्णा आचार्य ने सरस्वती वंदना के साथ अपनी देशभक्ति रचना सुनाई।  वरिष्ठ कवयित्री प्रमिला गंगल ने अपने ओजस्वी गीत-नीति के गीत गाओ, गाओ तो सही, कवि-कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने दिल के द्वार बंद हों तो खट-खटकर उनको खुलवाओ, दर्द बढ़ गया हो तो फिर व्यक्त करो, मत उसे छुपाओ, गीतकार मनीषा आर्य सोनी ने मिली हुयी आजादी का हमें कर्ज चुकाना बाकी है, नाथूसर के छैलू चारण ‘छैल’ ने जब तक सांस है ना मां भारती पर आंच न आने दूं सुनाकर तालियाँ बटोरी | पार्षद एवं कवयित्री सुधा आचार्य ने-जो अपनी निज संस्कृति पर करे अभिमान के साथ तवांग यात्रा के संस्मरण सुनाए |  कवयित्री मधुरिमासिंह, राज बिजारणिया (लूणकरणसर), संजय आचार्य ‘वरुण’, बाबूलाल छंगाणी ने भी ओज पूर्ण रचनाएं प्रस्तुत की।कार्यक्रम का संचालन प्रांत की उपाध्यक्षा मोनिका गौड़ ने सफलतापूर्वक करते हुए अपनी रचना- मैं ही जन में मैं ही मन में, मैं ही भारत भाग्य विधाता हूं, मैं ही हिन्दुस्तान हूं सुनाकर माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया | कार्यक्रम में मंजुल मुकुल वर्मा, चन्दन तलरेजा, केके शर्मा, दिनेश पांडेय, ज्योति स्वामी, इंदु पांडेय, रीतेश कुमार जी, गणेश, शिव कुमार आर्य ने भी विचार रखे ।
प्रांत अध्यक्ष डॉ.अखिलानंद पाठक ने विवेकानंद यात्रा के सम्बन्ध में सभी की भागीदारी की बात कहते हुए इसे सफल बनाने का आह्वान किया। सभी के प्रति आभार घनश्यामसिंह एवं विनोद ओझा ने ज्ञापित किया ।
राजाराम स्वर्णकार   

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