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विश्वविद्यालयों की अनदेखी।

– हेम शर्मा

राजस्थान के विवि में शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार की स्थितियां अच्छी नहीं है। आई सी ए आर ने राजस्थान को ताजा रैंकिंग रिपोर्ट जारी कर चेताया है। दुर्भाग्य है कि राजस्थान सरकार और कुलाधिपति को इसका भान तक नहीं है। अगर होता तो यह स्थिति नहीं बनती। आखिर जिम्मेदार कौन है ? क्या ऐसी गैर जिम्मेदारी से आंखे मूंदी जा सकती है अथवा माफ करने जैसी यह गैर जिम्मेदारी है।
कुलाधिपति महोदय भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ताजा रैंकिंग ने राजस्थान के कुलपतियों की वास्तविकता सामने रख दी है। इस रैंकिंग में 37 वें स्थान पर आए विवि के अंदर झांककर तो देखें। कुलपतियों की कैसी तस्वीर बनती है। यह तस्वीर शर्मनाक तो नहीं है। कुलपति समाज में गुरुत्तर दायित्व वाला पद है। कुलपतियों के सम्मेलन में कुलाधिपति क्या संदेश और दिशा देना चाहते हैं यह तो वक्त ही बताएगा। आई सी ए आर ने सभी विवि को आईना दिखा दिया है। राजस्थान का एक ही विवि टॉप 10 में नहीं है। यही नहीं कुछ कुलपतियों के खिलाफ राज्य सरकार और खुद कुलाधिपति शिकायते हैं। मामले उच्च न्यायालय में भी हैं। विवि की ऐसी हालातों के प्रति आखिर कौन जिम्मेदार है ? सरकार और राजभवन विवि के गिरते स्तर पर जिम्मेदारी तो तय करें। राजस्थान जैसे बड़े प्रदेश में विश्वविद्यालयों के ये हालत वास्तव में चिंताजनक है। विश्व विद्यालयों में कुलपति प्रतिष्ठा का पद है। कुलपति पूरे देश और समाज को शिक्षा के प्रकाश से दिशा देते हैं। कुलपतियों की कार्यव्यवस्था को कुलाधिपति दिशा निर्देश देते हैं। क्या आज के कुलपतियों की प्रतिष्ठा कुलपति पद की मूल भावनाओं के अनुरूप है। या कुलपति पद पर नियुक्तियां राजनीतिक तुष्टिकरण या धनबल से होने लगी है। विश्व विद्यालय उच्च शिक्षा के उद्देश्यों को पूरा भी कर पा रहे हैं या राजनीति के केंद्र बन हुए हैं।
राजस्थान में 28 विवि हैं। इसमें से 13 में राजस्थान से बाहर के कुलपति है। जिसमें सर्वाधिक उत्तर प्रदेश के ही क्यों है? इस सवाल के दोनों तरह के जवाब है। पर यर्थात सरकार भी जानती है और राजभवन भी। राजनीतिक मजबूरियां राजस्थान की उच्च शिक्षा के साथ खिलवाड़ का कारण बनी हुई हैं। सरकार दवाब में है या राजभवन जनता और शिक्षा जगत सब देख रहा है। सब जानते बूझते यह सब होने दे रहे हैं। अगर विवि में कुछ गलत हो रहा है तो सरकार की जिम्मेदारी है इसे ठीक करें। जनप्रतिनिधि उजागर करें। राजभवन, राज्य सरकार और विवि की सर्वोच्च बॉडी कुलपति नाम तय कर योग्यता के आधार पर छंटनी के बाद राज्य सरकार की अनुशंसा से कुलपति का चयन किया जाता हैं । फिर कहा चूक हो रही है। राज्य सरकार और राजभवन इसे देखें। अन्यथा विश्वविद्यालय शिक्षा का क्या हश्र होने वाला है कहने की जरूरत नहीं है

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