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विश्व दृष्टि दिवस पर विशेष :विश्व दृष्टि दिवस पर नेत्रदान का संकल्प लें और अपनी आंखों का रखें ध्यान : मुशरफ खान

-अपील आइये दृष्टिहीनों की अंधेरी दुनिया में रोशनी बिखेरने का संकल्प लें

-एक व्यक्ति चार दृष्टिहीनों के जीवन में ला सकता हैं रोशनी

आगरा। विश्व दृष्टि दिवस हर साल अक्टूबर के दूसरे गुरुवार को अंधेपन और दृष्टि हीनता के मुद्दे पर लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिये 13 अक्तूबर को मनाया जाता हैं। इसकी शुरुआत 1998 मे लायंस क्लब इंटरनेशनल फाउंडेशन के साइट फर्स्ट कैंपन के द्वारा हुई थी। ये संगठन दुनियाभर में आंखों की बीमारी, उससे जुड़े जोखिम और देखभाल को लेकर जागरुकता का प्रसार करता हैं।

विश्व दृष्टि दिवस के अवसर पर राष्ट्रवादी सामाजिक चिंतक एवम् वरिष्ठ समाजसेवी मुशरफ खान ने कहा कि विश्व दृष्टि दिवस हर साल अक्टूबर के दूसरे गुरुवार को आंखों की सेहत, सुरक्षा और इसे लेकर जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। आंखें हैं तो दुनिया की सारी नेमतें हैं। अपनी दृष्टि के कारण ही हम जीवन के रंग और सौंदर्य देख पाते हैं। आंख शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है और अगर वही नहीं है तो व्यक्ति का जीवन किसी काम का नहीं। विश्व दृष्टि दिवस के दिन हमें प्रकृति का आभार भी व्यक्त करना चाहिए कि उसने हमें दृष्टि प्रदान की। साथ ही वे लोग जो देख नहीं पाते, उनके जीवन में रोशनी फैलाने के लिए नेत्रदान का संकल्प भी लेना चाहिए। किसी की जिंदगी में उजाला करने से बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं है। किसी व्यक्ति की अंधकार जिंदगी को नई रोशनी प्रदान करना सबसे बड़ा पुण्य कार्य माना जाता है। इसलिए कहा जाता है कि ‘नेत्र दान महादान’। यदि आप भी नेत्रदान करके दूसरों की जिंदगी में उजाला करना चाहते हैं तो इसके लिए आज से बढ़िया कोई दिन हो ही नहीं सकता। नेत्रदान मृत्यु के बाद भी जीवित रहने का अनमोल वरदान हैं। नेत्रदान कर दुनियां छोड़ने के बाद भी दृष्टिहीनों की जिंदगी रोशन कर सकते हैं। एक व्यक्ति चार दृष्टिहीनों के जीवन में रोशनी ला सकता हैं। विश्व दृष्टि दिवस पर नेत्रदान का संकल्प लें और अपनी आंखों का ध्यान रखें। क्योंकि दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग ऐसे हैं, जो ठीक से देख नहीं सकते हैं। उनके पास चश्मे तक पहुँच की सुविधा नहीं है। इनमें से एक अरब लोग निवारण किये जा सकने योग्य दृष्टि दोष से पीड़ित हैं। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार आंखे कभी भी वृद्ध नहीं होतीं, इसलिए इसके लिए किसी तरह की उम्र सीमा नहीं होती। एक वृद्ध व्यक्ति भी अपनी इच्छानुसार अपनी आंखें दान कर सकता है। नेत्रदान करके आप की आंखें अजर अमर बन सकती हैं।

श्री खान ने सभी से अपील करते हुये कहा कि रक्तदान की तरह नेत्रदान के लिए भी हम सबको आगे बढ़कर आना चाहिए और नेत्रदान को लेकर अपनी हिचक को तोड़ना चाहिए। तो आज इस खास दिन पर हम सभी से विनम्र अपील करते हैं कि अपनी आंखों का खूब ध्यान रखें और नेत्रदान का संकल्प लें। हमारे जाने के बाद भी हमारी आंखें इस दुनिया में जीवित रह सकती है और किसी के जीवन में उजियारा ला सकती है। इसीलिए विश्व दृष्टि दिवस बहुत महत्वपूर्ण हैं और आंखों की आधी समस्याएं लोगों की जागरूकता से भी रोकी जा सकती है। इसलिए हम सबको मिलकर इस और कदम बढ़ाना होगा। क्योंकि जैसे – जैसे हमारी दुनिया डिजिटल होती जा रही है। वैसे – वैसे हम अपनी आंखों के साथ अधिक खिलवाड़ करने लगे हैं। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार हमारा स्क्रीन टाइम इतना बढ़ गया है कि आंखों पर लगातार ज़ोर पड़ रहा है और इस कारण चिड़चिड़ा पन, स्ट्रेस, बर्निंग आई, आंखों में लाली, थकान और सिरदर्द जैसी समस्याएं क्या बच्चे क्या बड़े सभी मे आम हो रही है। ये एक बहुत बड़ी चेतावनी भी है कि हम प्रकृति के इस अनुपम उपहार की सुरक्षा करें और आंखों के महत्व को समझें। आज के समय में खासकर बच्चे और युवाओं द्वारा मोबाइल, लैपटॉप व अन्य इलेक्ट्रोनिक साधनों का बहुत उपयोग किया जा रहा है। इस तरह अभिभावकों को विशेष ध्यान देना चाहिए अन्यथा कई तरह की समस्याएं आती है। आंखों को बार-बार गंदे हाथों से न छुए, पानी भी भरपूर पीते रहे, जिससे डिहाइड्रेशन ना होने पाए और आंखें ड्राई होने से बच सकते हैं। तेज धूप से बचना चाहिए धूम्रपान एवम् नशे से बचें। संतुलित आहार ले जिससे पोषक तत्व आंखों को मिल सके और कंप्यूटर पर कार्य करने वालों के लिए विशेष रूप से सलाह है कि आधा घंटा कंप्यूटर चलाने के बाद 15 से 20 फीट दूर आधा मिनट तक देखें।

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