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वेबिनार के माध्यम से ‘सरोकार’ ने भरी शब्दों की उड़ान

– डिजिटल सरोकार ‘कितने दूर, कितने पास’ आयोजित

लूनकरणसर,27 दिसम्बर। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कला एवं साहित्य से जुड़े मंच ‘सरोकार’ का साहित्य संवाद कार्यक्रम ‘कितने दूर, कितने पास’ सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से आयोजित हुआ। इस वेबिनार साहित्यिक संवाद में राजस्थान एवं राजस्थान के बाहर बैठे रचनाधर्मियों ने अपनी रचनाओं के साथ सशक्त उपस्थिति दर्ज करवाई। युवा रचनाकार राजूराम बिजारणियां ने वैश्विक संकट के इस दौर में जीवन के तनाव व संत्रास से मुक्ति पाने के लिए साहित्य को सुकून भरी ठंडी छाँव बताया। कवि, कथाकार मदन गोपाल लढ़ा ने नवांकुरों को ठहराव के साथ नए विषय और बिम्ब तलाशने की बात कही। जे.एन.यू. स्कॉलर देवीलाल गोदारा ने लेखन की भाषा का ध्यान रखने और महज़ तुकबंदियों से बचने की सलाह दी वहीं कान्हा शर्मा और दुर्गाराम स्वामी ने अच्छा साहित्य पढ़ने के लिए सम्भागियों को प्रेरित किया।

इस अवसर पर ‘कविता के बहाने’ सत्र में मदन गोपाल लढ़ा ने अपनी प्रतिनिधि कविताएं सुनाई तो राजूराम बिजारणियां ने ‘हर लम्हा है आज डरा क्यों’ और ‘भगतसिंह’ गीत सुनाया। कान्हा शर्मा ने ‘यह पथरीली लाल माटी, मुक्त हो गयी है बांझपन के शाप से’, ‘ब्हावै कोई-बीजै कोई’ शीर्षक की रचनाएं प्रस्तुत की। देवीलाल महिया ने ‘बा सायद मां ही अर ठा नी क्यूं’ और नन्दकिशोर सारस्वत ने गद्य रचना ‘प्रेम पत्र’ का वाचन किया। राजदीप सिंह इंदा ने ‘गरीबी’, ‘बगत पाणी ज्यूं बेवै’ बंसी स्वामी ने ‘कलमें यूं ही भटकेंगी’ और ‘भय क्या है’ अजय झोरड़ ने ‘कोशिश मेरी जारी है’, बजरंग नाई ने ‘ऊंट’, इत्यादि अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया। वेबिनार के दौरान राकेश स्वामी, धर्मपाल रोझ, बजरंग शक्तिसुत, रामेश्वर स्वामी ने भी अपने विचार साझा किए।

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