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शाहजहाँपुर-खेड़ा बॉर्डर पर मंगलवार को 107 वें दिन आंधी-तूफान ने मचाई भारी तबाही

— तम्बू उखडे,सब कुछ अस्त-व्यस्त, फिर भी बुलंद है, किसानों के हौसले

गुरुग्राम, हरियाणा (दिनेश शर्मा “अधिकारी”)। शाहजहाँपुर-खेड़ा बॉर्डर पर सुबह से शुरू हुआ आंधी-तूफान का दौर देर शाम तक भी लगातार जारी रहा, तेज हवाओं से किसानों के तम्बू उड़ गए तथा सभा स्थल भी पूरी तरह से तहस-नहस हो गया

हालांकि के आंधी-तूफान में भारी नुकसान हुआ है परन्तु फिर भी मोर्चे पर मौजूद किसानों के हौसले पूरी तरह से बुलंद हैं और किसान कोई भी कुर्बानी देकर और तमाम मुसीबतों को झेलते हुए मांगे पूरी होने तक लड़ाई जारी रखने के संकल्प के साथके साथ मोर्चे पर डटे हुए हैं।

आज मोर्चे पर आमसभा के स्थान पर अलग-अलग समूहों में सामूहिक चर्चाओं का आयोजन किया गया। इन समूह-चर्चाओं में किसानों ने आज तीनों कृषि कानूनों के विभिन्न पहलुओं पर और सरकार की नीतियों पर विस्तार-पूर्वक चर्चा की।

आज की इन समूह चर्चाओं में अमराराम, तारा सिंह सिद्धू,डॉ.संजय”माधव”,पेमाराम,कालूराम थोरी, पवन दुग्गल,मास्टर रघुवीर सिंह भेरा, अनिल जीतरवाल आदि ने अलग अलग समूहों में किसानों के साथ समूह-चर्चाओं में हिस्सा लेते हुए कानूनों के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करते हुए समाज के अलग अलग हिस्सों पर होने वाले प्रभावों को स्पष्ट करते हुए किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।

आने वाले दिनों में अलग अलग विषयों पर समूह-चर्चाओं के आयोजन का फैसला लिया गया है।

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