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शाहजहांपुर-खेड़ा बॉर्डर पर आज 84 वें दिन भी जारी रहा आंदोलन

गुरुग्राम /हरियाणा । (दिनेश शर्मा” अधिकारी “)। मार्च शनिवार को शाहजहांपुर-खेड़ा बॉर्डर पर आमसभा को संबोधित करते हुए किसानों ने कहा कि पूंजीपतियों की नज़र हमेशा से देश के सबसे बड़े कृषि क्षेत्र पर रही है। दशकों से हर सरकार की कोशिश रही है कि खेती किसानी को कॉरपोरेट के हाथ सौंपा जाए। पहले की कांग्रेस सरकारों की कोशिश सफल नहीं हुई लेकिन भाजपा ने इन मंसूबों को एक कदम आगे बढ़ा दिया है।

भारत की सबसे बड़ी आबादी आज भी कृषि क्षेत्र पर आश्रित है। नरेंद्र मोदी सरकार की कोशिश है कि इनके कुछ पूंजीपति मित्रों को इस बड़े क्षेत्र पर नियंत्रण मिल जाये। इन तीन कृषि-विरोधी कानूनों का यही परिणाम होगा जिस कारण देश भर के किसान आंदोलित हैं।

आज पूर्वी राजस्थान के दौसा जिले से आये संयुक्त किसान मोर्चा, दौसा की ओर से संपतराम मीणा, रामकिशन ठेकेदार, डॉ.सी.एल.मीणा,प्रेम सिंह मीणा, भीम सिंह मीणा, जगदीश मीणा, बाबू लाल मीणा आदि ने आंदोलन के लिए एक जनरेटर सैट, माइक सैट और इक्कीस हजार रुपये की नगद सहायता आंदोलन के लिए प्रदान की।

आज की आमसभा को निम्नलिखित वक्ताओं ने संबोधित किया:-

कृष्ण कुमार, सहज प्रीत सिंह, अमन वढला , काला सिंह मंडार, भूपेंद्र सिंह, सुखराज सिंह मान, सुखदेव सिंह, छगन चौधरी, कामरेड राजेन्द्र सिंह अधिवक्ता, घाजु राम रावत, महेंद्र सिंह, लक्ष्मण सिंह गोंडा , जगमाल पूर्व सरपंच, आनंद यादव, पाल सिंह खरलिया, रामकिशन महलावत, हिमांशु विद्रोही, भगत सिंह, सुरेंद्र चौधरी, ज्ञानी राजवीर सिंह, राजा राम मील, हरलाल सिंह मील, ईशा शर्मा,डॉ.सी.एल.मीणा आदि।

आज की आमसभा का संचालन निर्मल कुमार ने किया।

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