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श्रीमद् भागवत कथा में नंदोत्सव का प्रसंग सुनाया

बीकानेर। नंद के आनंद भैयो, जय कन्हैयालाल की,हाथी दिजै,घोड़ा दिजै सरीखे जयघोष से मंगलवार को स्वामी मोहल्ला स्थित सरगम भवन गूंज उठा। अवसर था श्रीमद् भागवत कथा में नंदोत्सव प्रसंग का। कथा वाचक भागवताचार्य पं विजय व्यास ने नंदोत्सव प्रसंग की व्याख्या की, तो पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने थालियां बजाकर कृष्ण जन्म की खुशियां मनाई। इस मौके पर कथा वाचक पं व्यास ने कहा कि आनंदित मन से सभी इन्द्रियों को भगवान के पास ले जाना,संसार से अपना चित्त अनासक्त करना और भक्तों के हृदय में सहज प्रेम को जगाना ही नंदोत्सव है। उन्होंने भागवत कथा श्रवण के महत्व पर प्रकाश डाला। व्यास ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने मात्र से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। आस्थावान श्रद्धालुओं को भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए।
कथा में बाल कृष्ण और नंदबाबा की सजीव झांकी निकाली गई। नंद बाबा एन डी रंगा जैसे ही बाल कृष्ण उद्धव रंगा को लेकर पांडाल में पहुंचे तो माहौल आनंदमय हो गया। पंडित व्यास ने प्रसंगों की व्याख्या करते हुए बताया कि कृष्ण जन्म को नंद महोत्सव कहा जाता है। उन्होंने पूतना उद्धार, शकट भंजन लीला, तृणावर्त उद्धार,नामकरण संस्कार,बाल लीला,दामोदर लीला,गोकुल से वृंदावन गमन तथा वत्सासुर एवं बकासुर उद्धार लीलाओं का वर्णन किया। नंदोत्सव के दौरान विमल कुमार चूरा,श्याम सुंदर चूरा,नागेश्वर जोशी,राजेश रंगा,राजेन्द्र जोशी,गणेश आचार्य,अभिषेक जोशी ने प्रसंग अनुसार संगीतमय भजनों की प्रस्तुति से समां बांध दिया।

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