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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की तबीयत बिगड़ी

– लखनऊ मेदांता में भर्तीतबीयत ब‍िगड़ने पर उन्‍हें लखनऊ के एससजीपीजीआई भेजा गया है।
लखनऊ, । श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें सोमवार को राजधानी लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने इमरजेंसी में भर्ती कर उनकी जांच की। महंत में सांस लेने की तकलीफ बनी हुई है।

मेदांता अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. राकेश कपूर के मुताबिक, महंत नृत्य गोपाल को सोमवार को लखनऊ लाया गया। उन्हें पौने चार बजे के करीब इमरजेंसी में भर्ती किया गया। पहले एंटीजेन किट से कोरोना टेस्ट किया गया, यह निगेटिव आया। ऐसे में आरटीपीसीआर के लिए सैंपल भेज दिया गया। महंत में कमजोरी, सांस फूलने की दिक्कत व दिल की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। डॉक्टरों की टीम उनकी मॉनिटरिंग कर रही हैं। महंत पूर्व में कोरोना के मरीज रह चुके हैं। उनमें पोस्ट कोविड इफेक्ट भी हो सकते हैं। लिहाजा, फेफड़े संबंधी अन्य आवश्यक जांचें भी कराई जा रही हैं।

महंत नृत्य गोपाल दास की तबीयत बिगडऩे पर अयोध्या से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर लखनऊ लाया गया। चिनहट से फैजाबाद मार्ग पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात की गई थी। चिनहट से मेदांता अस्पताल ट्रैफिक क्लीयर कराया गया। इसके बाद शहीद पथ के रास्ते मेदांता में भर्ती कराया गया। उनके स्वास्थ्य खराब होने की खबर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं उप मुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्य भी विचलित हो उठे तथा मंहत के सहयोगी एवं विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा तथा महंत के शिष्य जानकीदास से दूरभाष पर बात कर उनका हालचाल जाना और जिलाधिकारी अनुज कुमार झा को छावनी भेजकर महंत नृत्य गोपाल दास की समुचित चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया।
इसी वर्ष कृष्ण जन्मोत्सव में शामिल होने मथुरा गये महंत नृत्यगोपालदास की तबीयत 12 अगस्त को खराब हुई थी और अगले दिन जांच में वे कोरोना पॉजिटिव पाये गये थे। इलाज के लिए उन्हें गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां आइसीयू में सात सितंबर तक भर्ती रहे और स्वास्थ्य के सुधार के बाद उन्हें सात सितंबर को ही एयर एंबुलेंस से अयोध्या स्थित उनके आश्रम मणिरामदास जी की छावनी लाया गया था। हालांकि, यहां भी उनके स्वास्थ्य को लेकर पूरी सजगता बरती जा रही थी और तभी से ही वे चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की गहन निगरानी में थे। उनके स्वास्थ्य को ही ध्यान में रखकर गिनती के ही लोगों को उनके करीब जाने की इजाजत थी। इसके बावजूद उनका स्वास्थ्य बिगड़ना चिकित्सकों के लिए चिंताजनक है।

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