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संत संस्कृति और आध्यात्मिक परम्पराओं के संवाहक: हेम शर्मा

भारत वेद, वेदांत, श्रीमद् भागवत गीता, रामायण की परंपरा और संस्कृति से ओत प्रोत जन जीवन वाला राष्ट्र है। यहां का संत समाज हमारी संस्कृति और आध्यात्मिक परम्पराओं का संवाहक है। बीकानेर में इन दिनों नगर कीर्तन प्रभात फेरी निकलती है। यह प्रभात फेरी पुराने शहर और उप नगरीय क्षेत्र गंगा शहर, भीनासर में प्रतिदिन भौर में संत मीरा, सूरदास, कबीर के भजन अथवा चेतावनी के भजन गाते हैं। भोर की यह आध्यात्मिक चेतावनी मानव के परम ब्रह्म परमेश्वर को भजने का संदेश देती है। कोई भी इन भजनों को सुनकर भावविह्वल हुए बिना नहीं रह सकता। यह प्रभात फेरी और नगर कीर्तन नगरों की सुख शांति की भावना से किया जा रहा है। साथ में 18 फरवरी से पांच कुंडी विष्णु, लक्ष्मी हवन भंडारा का बीकानेर नगर वासियों को आव्हान भी है। शांति यज्ञ तथा भंडारा श्री हरि विष्णु देवानंद गिरी और संत मंडली की ओर से किया जा रहा। बीकानेर में इस दूसरे पांच कुंडी यज्ञ के अलावा महा शिव रात्रि शिव भोग भी 18 फरवरी को होगा। संत समागम और आध्यात्मिक आयोजन से सामाजिक जीवन में एकरूपता से आए ठहराव टूटता है। आस्थावान लोगों में उत्साह का भाव संचार होने से भक्तिमय वातावरण बनता है। यह भारतीय जीवन संस्कृति की विशेषता है। त्रयम्बकेश्वर नासिक महाराष्ट्र से आई संत मंडली नत्थूसर गेट के बाहर नाथ जी का धोरा पर बिराज रही है। संत तो आशीर्वाद ही दे सकते हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा ही देते है। यज्ञ, पूजा, प्रभात फेरी, नगर कीर्तन तो सद्भाव जाग्रत करने के तरीके हैं। नगरों में सुख शांति बनी रहे। यही हमारी जीवन संस्कृति है। संत समाज उसके संवाहक बने रहे। यज्ञ, कथा, प्रवचन, संत सम्मेलन भी आज के समाज की जरूरत है।

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